विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर में शुक्रवार को 74 देशों के 327 नौसैनिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने दर्शन किए। अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रमों के सिलसिले में भारत आए इस बहुराष्ट्रीय डेलिगेशन का मंदिर परिसर में पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।
महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी की अगुवाई में बौद्ध भिक्षुओं ने प्रतिनिधिमंडल को ‘खादा’ भेंट कर सम्मानित किया। अधिकारियों ने मंदिर परिसर स्थित विभिन्न पवित्र स्थलों का भ्रमण किया और उनके ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व की जानकारी प्राप्त की।
डेलिगेशन ने पवित्र बोधि वृक्ष के दर्शन किए, जिसके नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। अधिकारियों ने वृक्ष के नीचे ध्यान लगाया और बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों तथा शांति, दया और सह-अस्तित्व के संदेश के बारे में जाना।
डॉ. महारथी ने बताया कि प्रतिनिधियों को बुद्ध के जीवन-दर्शन, ज्ञान की महत्ता और विश्व में बौद्ध परंपरा की विशेषताओं से अवगत कराया गया।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य बोधि वृक्ष के संरक्षण, रखरखाव और देखभाल की प्रक्रिया के संबंध में भी जानकारी लेने को उत्सुक दिखे। दौरे के बाद कई विदेशी अधिकारियों ने इसे “आध्यात्मिक और स्मरणीय अनुभव” बताया तथा कहा कि बोधगया आकर उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझने का अवसर मिला।
उल्लेखनीय है कि ये सभी अधिकारी आगामी इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और MILAN-26 कार्यक्रम में भाग लेने के लिए भारत आए हैं। भारतीय नौसेना वर्ष 1995 से विशाखापट्टनम में प्रत्येक दो वर्ष पर बहुपक्षीय समुद्री आयोजन करती है, जिसका उद्देश्य समुद्री सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सौहार्द को बढ़ावा देना है।
बुद्ध की धरती से शांति और करुणा का संदेश लेकर लौटे इन वैश्विक प्रतिनिधियों का यह दौरा आध्यात्मिक एवं कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।