तीन दशक तक आतंकियों को समर्थन देना पाकिस्तान की ऐतिहासिक भूल: रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा कबूलनामा पहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग, क्षेत्रीय शांति पर जताई चिंता

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आतंकवाद को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने न सिर्फ पाकिस्तान की पूर्व नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में भी नई बहस छेड़ दी है। ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि पाकिस्तान ने लगभग तीन दशकों तक पश्चिमी देशों के हित में आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तीय मदद दी थी। उन्होंने इसे पाकिस्तान की एक “भारी भूल” बताया और कहा कि इसके परिणामस्वरूप देश ने असाधारण क्षति उठाई है।

ख्वाजा आसिफ ने कहा,
“हमने पश्चिमी ताकतों के निर्देश पर अपनी धरती पर आतंकवादी गतिविधियों को पनपने दिया। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो महसूस होता है कि यह फैसला पाकिस्तान के लिए आत्मघाती साबित हुआ। इस नीति ने हमारे देश को हिंसा, अस्थिरता और आर्थिक बदहाली की दलदल में धकेल दिया।”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को इन गलत नीतियों की कीमत न केवल हजारों जानों के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी छवि भी खराब करनी पड़ी।
आसिफ ने यह भी कहा कि अब पाकिस्तान क्षेत्रीय और वैश्विक शांति का समर्थक है और आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा।

पहलगाम हमले पर अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग

ख्वाजा आसिफ ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले का भी जिक्र किया। इस हमले में कई भारतीय सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। आसिफ ने हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करते हुए कहा:
“हम नहीं चाहते कि इस घटना से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़े या किसी प्रकार का युद्ध भड़के। हमारी इच्छा क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की है और हम पारदर्शी जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का स्वागत करते हैं।”

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की रणनीति में बदलाव?

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का यह बयान इस बात का संकेत हो सकता है कि पाकिस्तान अब वैश्विक दबाव और आंतरिक अस्थिरता के चलते अपनी पुरानी नीतियों में बदलाव करने पर मजबूर हो रहा है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की कड़ी निगरानी और विदेशी निवेश के अभाव ने भी पाकिस्तान को अपने आतंकवाद समर्थक छवि से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया है।

भारत की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत इस बयान को केवल शब्दों के खेल के रूप में नहीं देखेगा, बल्कि पाकिस्तान की धरातलीय कार्रवाई के आधार पर ही किसी ठोस प्रतिक्रिया पर विचार करेगा।

भारत की चिंताएं बरकरार

भारत ने हमेशा पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, खासतौर पर जम्मू-कश्मीर में हिंसा को लेकर। हालिया घटनाओं के बाद भी भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है। भारत सरकार लगातार यह मांग करती रही है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक उसे वैश्विक स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाए।

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