नीतीश कुमार से मिलने पैदल पटना पहुंचे बौद्ध भिक्षु, चंद्रशेखर आज़ाद करेंगे बोधगया दौरा, ASP की ‘विरासत बचाओ, भारत बचाओ यात्रा’ से आंदोलन को मिलेगी नई धार

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

गया स्थित विश्वविख्यात महाबोधि मंदिर के प्रबंधन को लेकर बौद्ध समुदाय का संघर्ष अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। बीते 82 दिनों से धरने पर बैठे बौद्ध भिक्षुओं ने अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीधी बातचीत के लिए पटना तक पैदल यात्रा शुरू कर दी है। उनकी मुख्य मांग है कि बोधगया टेंपल मैनेजमेंट एक्ट (BTMC एक्ट) 1949 को समाप्त किया जाए और महाबोधि मंदिर का सम्पूर्ण नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।

आकाश लामा बोले – 5 मई की रात पटना पहुंचेगी यात्रा

ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फॉर्म के जनरल सेक्रेटरी आकाश लामा ने कहा कि यह केवल आज का मामला नहीं है, बल्कि यह संघर्ष 1890 से चला आ रहा है। उन्होंने कहा, “मस्जिद मुसलमान की, मंदिर हिंदू की, गुरुद्वारा सिखों का हो सकता है, तो महाबोधि मंदिर पूरी तरह बौद्धों को क्यों नहीं सौंपा जा सकता?”

उन्होंने बताया कि “5 मई की रात यात्रा पटना पहुंचेगी और 6 मई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने का समय मांगा गया है। बौद्ध भिक्षु इस पदयात्रा में बौद्ध संगठनों के साथ मिलकर भाग ले रहे हैं।”

चंद्रशेखर आज़ाद का बोधगया दौरा – संघर्ष को मिला राजनीतिक समर्थन

भीम आर्मी के संस्थापक, सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद 12 मई को बोधगया का दौरा करेंगे। उन्होंने आंदोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि, “यह सिर्फ बौद्धों का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा का सवाल है।”

चंद्रशेखर आज़ाद के इस दौरे को आंदोलन को राष्ट्रीय मंच पर लाने की दिशा में एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

विरासत बचाओ, भारत बचाओ यात्रा’ से आंदोलन को नई ऊर्जा

आजाद समाज पार्टी ‘विरासत बचाओ, भारत बचाओ यात्रा’ BTMC एक्ट को निरस्त करने की मांग को लेकर पूरे बिहार में करने जा रही है। इसका नेतृत्व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह व बिहार प्रभारी कमल सिंह वालिया और प्रदेश अध्यक्ष जौहर आज़ाद करेंगे। यात्रा का रूट इस प्रकार है:

6 मई – मोतिहारी, मुजफ्फरपुर
7 मई – वैशाली
8 मई – पटना
9 मई – नालंदा
10 मई – नवादा
11-12 मई – बोधगया
13 मई – औरंगाबाद
14 मई – रोहतास
15 मई – कैमूर

इस यात्रा का उद्देश्य जनता को जागरूक करना और बौद्ध भिक्षुओं के आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाना है।

सरकार की चुप्पी पर सवाल, बुद्ध पूर्णिमा तक अल्टीमेटम

बौद्ध संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर बुद्ध पूर्णिमा तक सरकार ने सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो यह आंदोलन देशभर में फैलाया जाएगा। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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