पीएचडी नामांकन में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों से गरमाया पटना विश्वविद्यालय: 9 दिन बाद टूटी भूख हड़ताल, प्रीति पासवान की चेतावनी “मांगें पूरी नहीं हुईं तो 20 जून के बाद फिर तेज होगा आंदोलन”

पटना विश्वविद्यालय में सत्र-२०२५ के पीएचडी नामांकन को लेकर जारी विवाद ने नया मोड़ ले लिया। नामांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, पक्षपात और अपारदर्शिता के खिलाफ पिछले नौ दिनों से चल रही छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल विश्वविद्यालय प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हो गई। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और डीन ने आंदोलनकारी छात्रों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म कराई।

शोधार्थियों का आरोप है कि सीएसआईआर और यूजीसी-नेट के तहत “पीएचडी ओनली” उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र भरवाने और साक्षात्कार लेने के बाद भी उन्हें नामांकन से वंचित कर दिया गया। छात्रों का कहना है कि मेधा सूची में नाम आने के बावजूद कई योग्य अभ्यर्थियों का नामांकन नहीं किया गया, जबकि चयन प्रक्रिया में पक्षपात और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया।

यह आंदोलन “रिसर्च स्कॉलर संघर्ष समिति”, अखिल भारतीय छात्र महासंघ तथा पीएफवीसी के संयुक्त बैनर तले चल रहा था।

प्रीति पासवान ने लगाया गंभीर आरोप

आईसा की कार्यकर्ता और पटना की सक्रिय छात्र नेत्री प्रीति पासवान ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय ने सीएसआईआर और यूजीसी-नेट के तहत “पीएचडी ओनली” उत्तीर्ण छात्र निवास कुमार से आवेदन पत्र भरवाया, साक्षात्कार लिया और मेधा सूची में नाम प्रकाशित करने के बावजूद नामांकन से वंचित कर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन प्रक्रिया में व्याप्त भ्रष्टाचार, पक्षपात और अपारदर्शिता के खिलाफ “रिसर्च स्कॉलर संघर्ष समिति”, अखिल भारतीय छात्र महासंघ और पीएफवीसी के संयुक्त बैनर तले लगभग एक महीने से आंदोलन चल रहा था, जबकि पिछले नौ दिनों से छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे।

प्रीति पासवान ने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और डीन द्वारा नामांकन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की समीक्षा करने तथा छात्रों की कुलपति से वार्ता कराने के आश्वासन के बाद भूख हड़ताल समाप्त की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो गर्मी की छुट्टी के बाद २० जून से आंदोलन को फिर से तेज किया जाएगा।

सीनेट बैठक में गूंजा नामांकन विवाद

शुक्रवार को आयोजित पीयू सीनेट की बैठक में भी पीएचडी नामांकन में कथित गड़बड़ी का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। छात्र नेताओं समेत कई सीनेट सदस्यों ने कुलपति के समक्ष मामले की समीक्षा कराने और नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय को मेधा सूची के साथ स्नातकोत्तर और साक्षात्कार के अंक सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सके। साथ ही विभिन्न विभागों में लगे पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई।

भूख हड़ताल के दौरान बिगड़ी छात्र नेता की तबीयत

आंदोलन के दौरान २० मई को भूख हड़ताल पर बैठे पीएफवीसी के बिहार प्रदेश महासचिव विद्यानंद पासवान की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद विद्यानंद पासवान ने कहा था कि जब तक छात्रों की मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

छात्र संघ का भी मिला समर्थन

भूख हड़ताल को पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के पदाधिकारियों का भी समर्थन मिला। छात्र संघ के महासचिव खुशी तिवारी, संयुक्त सचिव अभिषेक और कोषाध्यक्ष हर्षवर्धन ने आंदोलनकारी छात्रों की मांगों को न्यायसंगत बताते हुए कुलपति से तत्काल वार्ता करने की मांग की।

वहीं, अखिल भारतीय छात्र महासंघ के राज्य सह सचिव सुशील उमाराज ने कहा कि नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए विश्वविद्यालय को मेधा सूची में स्नातकोत्तर और साक्षात्कार के अंक प्रकाशित करने होंगे।

सीनेट सदस्य को सौंपा गया ज्ञापन

आंदोलनकारी छात्रों ने पीयू सीनेट सदस्य प्रोफेसर डॉ. शोभन चक्रवर्ती को भी ज्ञापन सौंपा। छात्रों के अनुसार, प्रोफेसर चक्रवर्ती ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएंगे और छात्रों के पक्ष में हरसंभव प्रयास करेंगे।

भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन में आकाश प्रियदर्शी, प्रीति पासवान, जाह्नवी राय, कृष्णा यादव, अंकुश कुमार, कृष्ण कुमार समेत कई छात्र और शोधार्थी शामिल रहे।

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