The Wire, Maktoob Media सहित कई स्वतंत्र मीडिया संस्थानों पर हमला!प्रेस क्लब, वुमेन्स प्रेस कॉर्प्स सहित कई मीडिया संगठनों और भाकपा (माले) ने की तीखी निंदा

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

भारत में पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक और हमला करते हुए सरकार ने स्वतंत्र मीडिया संस्थान The Wire की वेबसाइट को देशभर में ब्लॉक कर दिया है। इस संबंध में The Wire ने बयान जारी कर बताया कि कुछ इंटरनेट सेवा प्रदाताओं ने यह जानकारी दी है कि यह कार्रवाई इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश पर, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत की गई है।

इसके अलावा, Maktoob Media, Free Press Kashmir और The Kashmiriyat जैसे मीडिया प्लेटफार्मों के X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट्स को भी भारत में “लीगल डिमांड” के तहत ब्लॉक कर दिया गया है। इसके साथ ही वरिष्ठ पत्रकार अनुराधा भसीन, मुज़म्मिल जलील और अन्य के सोशल मीडिया अकाउंट्स भी इस आधार पर निलंबित कर दिए गए हैं।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वुमेन्स प्रेस कॉर्प्स, प्रेस एसोसिएशन और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए इस कदम की तीखी निंदा की है। इन संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने वास्तव में यह कदम उठाया है, तो यह स्वतंत्र प्रेस और लोकतंत्र के मूल्यों पर सीधा हमला है और यह अधिकारों की अवहेलना है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि बिना किसी कानूनी स्पष्टीकरण के मीडिया अकाउंट्स पर लगाए गए प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए, ताकि मीडिया को बिना किसी दबाव के अपने कार्य को स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार मिल सके।

इस घटना पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (CPIML) ने भी अपना बयान जारी किया और कहा कि यह कार्रवाई स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

सीपीआईएमएल के बयान में कहा गया “जब मुख्यधारा का मीडिया फेक न्यूज़ और राष्ट्रवादी प्रचार में उलझा हुआ है, तब सच्चाई की रिपोर्टिंग करने वाले मीडिया संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई करना, लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की कोशिश है। यह संविधान द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।”

पार्टी ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने 8,000 से अधिक एकाउंट्स को ब्लॉक करने के आदेश दिए हैं, जिनमें पत्रकार, कार्यकर्ता, अकादमिक, और आम नागरिक शामिल हैं। इन आदेशों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे पारदर्शिता की कमी और सवाल खड़े होते हैं।

सीपीआईएमएल ने सभी न्यायप्रिय नागरिकों से अपील की है कि वे इस सेंसरशिप और जमानत के खिलाफ एकजुट हों और स्वतंत्र मीडिया की आवाज़ को दबाने के खिलाफ खड़े हों।

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