अयोध्या कोर्ट ने नेहा सिंह राठौर के खिलाफ शिकायत खारिज की, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर उठे थे सवाल

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की एक अदालत ने मंगलवार को भोजपुरी गायिका नेहा सिंह राठौर के खिलाफ दायर की गई आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया। यह शिकायत उनके सोशल मीडिया पोस्ट के संबंध में थी, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले पर टिप्पणी की थी। अदालत ने शिकायत को “अस्वीकार्य” करार देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के पास इसे दायर करने का वैध अधिकार नहीं था।

शिकायत में क्या था आरोप?

शिवेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने शिकायत में आरोप लगाया था कि राठौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को इस हमले से जोड़कर सोशल मीडिया पर “देशद्रोही” टिप्पणियाँ कीं। उनका कहना था कि इन टिप्पणियों से सामाजिक अशांति फैलने की संभावना थी और यह चुनावी लाभ के लिए की गई साजिश थी। शिकायत में यह भी आरोप था कि राठौर ने भाजपा नेताओं की छवि को नुकसान पहुँचाया और देश में गृह युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न की।

अदालत का निर्णय

अयोध्या की अतिरिक्त सिविल जज (वरिष्ठ डिवीजन) और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एकता सिंह ने शिकायत को खारिज करते हुए कहा कि यह “अस्वीकार्य” है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता के पास इसे दायर करने का वैध अधिकार नहीं था। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 222(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का आरोप है, तो शिकायत केवल सार्वजनिक अभियोजक द्वारा केंद्र या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से दायर की जा सकती है। चूंकि इस मामले में ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए शिकायत को खारिज कर दिया गया।

नेहा सिंह राठौर की प्रतिक्रिया

नेहा सिंह राठौर ने अदालत के इस निर्णय का स्वागत किया और इसे अपने खिलाफ की गई राजनीति से प्रेरित आरोपों के खिलाफ न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट केवल सवाल उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने के उद्देश्य से थे।

अयोध्या कोर्ट का यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दुरुपयोग के मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। नेहा सिंह राठौर के खिलाफ दायर की गई शिकायत को खारिज करने से यह संदेश जाता है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप नहीं लगाए जा सकते।

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