वक़्फ़ संशोधन क़ानून 2025 के खिलाफ शिवहर व दरभंगा में ज़ोरदार विरोध,हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल! ईमारत-ए-शरीआ व मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की रहनुमाई में शांतिपूर्ण आवाज बुलंद

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वक़्फ़ संशोधन क़ानून 2025 के विरोध में आज बिहार के ज़िले शिवहर और दरभंगा में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और ईमारत-ए-शरीआ बिहार, ओडिशा व झारखंड की सरपरस्ती में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और जनसभा का आयोजन हुआ। यह प्रदर्शन सिर्फ मुसलमानों की नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा विरासत और संवैधानिक अधिकारों की आवाज बनकर सामने आए।

शिवहर में अमीर-ए-शरीअत की सरपरस्ती में ऐतिहासिक विरोध रैली

ज़िला शिवहर में अमीर-ए-शरीअत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी की निगरानी में एक भव्य और शांतिपूर्ण विरोध रैली निकाली गई, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में प्लेकार्ड थे, जिन पर लिखा था:

“वक़्फ़ संशोधन कानून 2025 वापस लो!”
“काला कानून नामंज़ूर!”

रैली की सबसे अहम बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में हिंदू भाइयों ने भी हिस्सा लिया, जिससे यह संदेश गया कि वक़्फ़ संपत्तियों की हिफाज़त सिर्फ मुसलमानों का नहीं, बल्कि देश की साझा संस्कृति और कल्याणकारी ढांचे का मामला है।

मौलाना मुफ्ती अहमद हुसैन (सहायक नाज़िम, ईमारत-ए-शरीआ) ने कहा “वक़्फ़ संशोधन कानून न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि यह बुनियादी अधिकारों पर हमला है जिसे देश की अवाम बर्दाश्त नहीं करेगी।”

दरभंगा में सभा: “वक़्फ़ सिर्फ मस्जिद-मदरसे नहीं, बल्कि क़ौमी तरक़्क़ी का ज़रिया है”

मदरसा उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा लिलबनात, बलवाहा दरभंगा में काज़ी-ए-शरीअत मुफ्ती अरशद अली रहमानी की अध्यक्षता में “वक़्फ़ संशोधन एक्ट 2025 और हमारी ज़िम्मेदारियाँ” विषय पर सभा का आयोजन किया गया।

मुफ्ती अरशद अली रहमानी ने कहा “लोगों को यह गलतफहमी है कि वक़्फ़ की संपत्तियाँ केवल मस्जिद, मदरसे और कब्रिस्तान होती हैं, जबकि हकीकत यह है कि इन ज़मीनों पर कई स्कूल, कॉलेज और अस्पताल भी चलते हैं जिनका फायदा 85% ग़ैर मुस्लिमों को होता है। अगर ये क़ानून लागू हो गया तो सबसे ज़्यादा नुकसान भी उन्हीं को होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि waqf-By-User की व्यवस्था को खत्म करना और 6 महीने में रजिस्ट्रेशन की शर्त एक साज़िश है, जिससे वक़्फ़ की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा किया जा सके। पांच साल तक मुसलमान होने की शर्त धार्मिक आज़ादी पर भी सीधा हमला है।

उलमा और इमामों की अपील: “एकता से लड़ें, आवाज बुलंद करें”

सभा को मौलाना अफज़ल इमाम फारूकी नदवी, मौलाना खालिद सैफुल्लाह क़ासमी, क़ारी एजाज़ बलवाहा, मौलाना नोशाद आलम अशाअती, क़ारी एहसानुल हक़, और मौलाना अता उल्लाह नदवी ने भी संबोधित किया।

सभी वक्ताओं ने ज़ोर देकर कहा “यह सिर्फ मुस्लिम समाज का मसला नहीं, बल्कि भारत के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का सवाल है। इसलिए देश के हर नागरिक को इस अन्यायपूर्ण कानून के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।”

महिलाओं की बड़ी भागीदारी और दुआ की अपील

सभा में सैकड़ों महिलाओं की मौजूदगी रही। क़ाज़ी साहब ने अपील की कि “हमारी माएं और बहनें रोज़ा, सदक़ा और दुआ के ज़रिए इस मुहिम को रूहानी ताक़त दें।”

शिवहर और दरभंगा के ये विरोध प्रदर्शन इस बात की गवाही देते हैं कि देश की अवाम वक़्फ़ की हिफाज़त के लिए तैयार है और ईमारत-ए-शरीआ की क़ियादत में चल रही यह मुहिम अब सिर्फ एक क़ौम की नहीं, बल्कि संविधान, इंसाफ और साझा विरासत की लड़ाई बन चुकी है।

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