“विचारधारा के लिए जेल नहीं भेजा जा सकता”: सुप्रीम कोर्ट से PFI के पूर्व महासचिव अब्दुल सत्तार को जमानत

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने आज पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व महासचिव अब्दुल सत्तार को जमानत दे दी है। उन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता श्रीनिवासन की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। यह हत्या अप्रैल 2022 में केरल के पलक्कड़ में हुई थी।

हालांकि अब्दुल सत्तार का हत्या में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होना साबित नहीं हुआ है, लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दावा किया था कि महासचिव रहते हुए उन्होंने कैडरों की भर्ती और हथियार प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों में भाग लिया था।

NIA ने कोर्ट में बताया कि सत्तार के खिलाफ 71 मामले दर्ज हैं। लेकिन सत्तार के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सोनधी ने दलील दी कि ये सारे मामले विचारधारा आधारित आंदोलनों जैसे हड़ताल और प्रदर्शन से जुड़े हैं, जिनमें उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुयां की पीठ ने केरल हाईकोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने को पलटते हुए कहा, “सिर्फ विचारधारा की वजह से किसी को जेल में नहीं डाला जा सकता।”

जब NIA ने तर्क दिया कि उन्हें भविष्य के अपराधों को रोकने के लिए हिरासत में रखा गया है, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यही समस्या है — हम व्यक्ति को विचारधारा के कारण जेल में डाल देते हैं। प्रक्रिया को सजा नहीं बनाना चाहिए।”

श्रीनिवासन की हत्या के मामले में कुल 44 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 35 को पिछले साल जून में जमानत मिल गई थी। सत्तार उन 9 में शामिल थे जिन्हें अब तक जमानत नहीं मिली थी।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विचार और असहमति के अधिकार की सुरक्षा के लिहाज़ से एक अहम टिप्पणी माना जा रहा है।

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