MediaOne संपादक को धमकी पर पत्रकार संगठनों में आक्रोश, वंदूर में CPM कार्यकर्ताओं ने लगाए ‘हाथ काटने’ के नारे

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

केरल के वंदूर में आयोजित एक राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI[M]) के कार्यकर्ताओं द्वारा मीडियावन चैनल के प्रबंध संपादक सी. दाऊद के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पत्रकारों के राज्य स्तरीय संगठन, केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला” करार दिया है।

KUWJ की राज्य समिति द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान सीपीएम कार्यकर्ताओं ने “अगर वह फिर बोलेगा तो उसका हाथ काट दिया जाएगा” जैसे खतरनाक नारे लगाए, जो न केवल अलार्मिंग हैं बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता के लिए भी गंभीर खतरा हैं। संगठन ने राज्य सरकार और पार्टी नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

यह घटना मलप्पुरम ज़िले के वंदूर में हुई, जहां पार्टी कार्यकर्ता एक स्थानीय कार्यक्रम के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। बताया गया कि प्रदर्शन की पृष्ठभूमि मीडियावन चैनल पर प्रसारित एक विश्लेषणात्मक कार्यक्रम था, जिसमें संपादक सी. दाऊद ने पूर्व विधायक एन. कन्नन के 1999 के विधानसभा भाषण का उल्लेख करते हुए ‘तालिबानीकरण’ शब्द का प्रयोग किया था। CPI(M) कार्यकर्ताओं ने इस रिपोर्टिंग को समुदाय-विरोधी करार देते हुए नारेबाज़ी की।

KUWJ के अध्यक्ष के.पी. रेड्डी और महासचिव सुरेश एदप्पल ने बयान में कहा कि, “पत्रकारों को धमकाना असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार को कुचलने की साजिश है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि खुद को जनपक्षधर कहने वाली पार्टी के कार्यकर्ता पत्रकार की जान को निशाना बना रहे हैं।”

पत्रकार संगठन ने यह भी चेताया कि यदि ऐसी घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर में पत्रकार समुदाय एकजुट होकर विरोध करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई isolated घटना नहीं है, बल्कि एक चिंताजनक प्रवृत्ति का संकेत है, जिसमें असहमत पत्रकारों को डराने की कोशिश की जाती है।

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है। कई वरिष्ठ पत्रकारों और मानवाधिकार संगठनों ने घटना को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि CPI(M) नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठने लगे हैं।

KUWJ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इस तरह की धमकियों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर मंच पर संघर्ष करेंगे।

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