उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति को सौंपा त्यागपत्र

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सकीय सलाह का हवाला देते हुए अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक औपचारिक पत्र लिखकर संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत अपना त्यागपत्र सौंपा।

धनखड़ ने अपने पत्र में लिखा है “स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं।”

उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिपरिषद का भी उनके मार्गदर्शन और समर्थन के लिए आभार प्रकट किया।

धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का मानसून सत्र आरंभ होने जा रहा है। ऐसे में देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद से उनका अचानक इस्तीफा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति धनखड़ को मार्च 2025 में दिल संबंधी समस्या के चलते नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों द्वारा कार्डियक स्टेंट प्रत्यारोपण किए जाने के बाद उन्हें लंबा विश्राम करने की सलाह दी गई थी। स्वास्थ्य में सुधार के बावजूद लगातार चिकित्सकीय निगरानी के चलते उन्हें कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखनी पड़ी थी।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। पद रिक्त होने की स्थिति में छह महीने के भीतर नए उपराष्ट्रपति का चुनाव कराना अनिवार्य है।

चुनाव आयोग अब जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी कर सकता है। राजनीतिक हलकों में संभावित नामों पर मंथन शुरू हो गया है, हालांकि सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 2027 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने अपने पद से करीब डेढ़ वर्ष पहले इस्तीफा दे दिया। उपराष्ट्रपति बनने से पहले वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और राजस्थान से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। वे कृषक परिवार से ताल्लुक रखते हैं और पेशे से वकील रहे हैं।

धनखड़ के इस्तीफे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “धनखड़ ने अपने कार्यकाल में कई बार निष्पक्ष भूमिका निभाई। हम उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।”
भाजपा नेताओं ने उन्हें “कठोर परिश्रमी और गरिमामय संवैधानिक पदाधिकारी” बताया और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा एक अप्रत्याशित घटनाक्रम है, जिससे न केवल संवैधानिक रूप से उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो गया है, बल्कि संसद के भीतर राजनीतिक संतुलन पर भी इसका असर पड़ सकता है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा और चुनाव प्रक्रिया कितनी शीघ्रता से पूरी की जाती है।

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