जहानाबाद में ₹5 के विवाद में बुज़ुर्ग सब्ज़ी विक्रेता मोहसिन की पीट-पीटकर हत्या

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

जहानाबाद ज़िले के काको बाज़ार में मंगलवार की शाम मामूली ₹5 के विवाद ने एक बुज़ुर्ग सब्ज़ी विक्रेता की जान ले ली। मृतक की पहचान 60 वर्षीय मोहम्मद मोहसिन के रूप में हुई है, जो पिछले चार दशकों से इसी बाज़ार में सब्ज़ी बेचकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नगर पंचायत शुल्क वसूलने वाले कर्मचारियों ने मोहसिन से ₹20 बाज़ार शुल्क माँगा। बिक्री कम होने की वजह से मोहसिन ने उस समय केवल ₹15 देने की गुज़ारिश की और शेष ₹5 बाद में चुकाने का अनुरोध किया। इस मामूली बहस के बाद शुल्क वसूली कर रहे व्यक्ति, जिसकी पहचान विकी पटेल के रूप में हुई है, ने उन पर लोहे के वज़न से हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से मोहसिन की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद बाज़ार में अफरातफरी मच गई। मोहसिन का शव घंटों तक ज़मीन पर पड़ा रहा और स्थानीय लोग आक्रोश में सड़कों पर उतर आए। ग़ुस्साए ग्रामीणों ने जहानाबाद-नालंदा मुख्य सड़क जाम कर दिया और दुकानदारों ने विरोध स्वरूप अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत के ठेकेदार के लोग लंबे समय से ज़्यादा शुल्क वसूलने के लिए दबाव बना रहे थे। मोहसिन आठ बच्चों के पिता थे और अपनी रोज़ाना की मामूली कमाई से ही पूरे परिवार का गुज़ारा करते थे

काको थाना पुलिस ने आरोपी विकी पटेल के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित की गई है और आरोपी को जल्द गिरफ़्तार किया जाएगा।

घटना ने राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इसे “बिहार का असली जंगलराज” बताते हुए सरकार पर हमला बोला। वहीं, सोशल मीडिया पर आरोपी की कुछ सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ तस्वीरें वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।

सिर्फ़ ₹5 के विवाद में हुई यह हत्या न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि बाज़ार वसूली व्यवस्था और गरीब तबके की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े करती है। फिलहाल, मोहसिन का परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी को मिली नई नेतृत्वकारी दिशा, उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित शोधकर्ता प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ निदेशक नियुक्त

प्रख्यात उर्दू विद्वान, शायर और आलोचक प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ ने आज ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल नहीं किए जाने पर जताई गहरी चिंता

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार सरकार द्वारा “सेवन रिजॉल्व्स-3 (2025-30)”

शोध को वास्तविक समाधानों में बदलना:ज़हूर हुसैन बट

आईआईटी कानपुर-एनवाईयू टंडन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी यह दिखाती है कि उभरती प्रौद्योगिकियों में

मज़फ्फरपुर में उर्दू भाषा प्रकोष्ठ का प्रतियोगिता कार्यक्रम: विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की उत्कृष्ट प्रतिभा, ‘उर्दू नामा’ पत्रिका का हुआ लोकार्पण

उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार सरकार की योजना के अंतर्गत उर्दू भाषा सेल, मज़फ्फरपुर