उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अज़ान देने को लेकर मुअज्जिन मुहम्मद इरफान के साथ पुलिसकर्मी द्वारा की गई कथित मारपीट और इस्लामोफोबिक टिप्पणी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मुस्लिम संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताते हुए, दोषी सब-इंस्पेक्टर विनोद चौधरी की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मकतूम मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की मदीना मस्जिद के मुअज्जिन इरफान को सुबह की अज़ान (फज्र) के बाद ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने पीटा और गैर-कानूनी ढंग से थाने ले जाकर कई घंटों तक हिरासत में रखा।
मुअज्जिन इरफान ने आरोप लगाया है कि सब-इंस्पेक्टर चौधरी ने थाने के अंदर उनसे कहा, “अज़ान देने का इतना शौक है तो पाकिस्तान चले जा।”
वकील जावेद ने इस घटना को संवैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह अवैध हिरासत और साम्प्रदायिक दुर्व्यवहार का स्पष्ट उदाहरण है!बिना किसी जुर्म के एक नागरिक को उसकी धार्मिक गतिविधि के लिए पीटना और ‘पाकिस्तान जाओ’ कहना, पुलिस बल में व्याप्त पूर्वाग्रह को दर्शाता है। यह अधिकारी पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने लायक है।”
इस घटना के बाद, जमीयत उलमा-ए-हिंद के नेतृत्व में मुस्लिम संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल तुरंत मस्जिद पहुंचा और मुअज्जिन इरफान से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को एक विस्तृत लिखित शिकायत सौंपकर मांग की है कि:
SI विनोद चौधरी को तुरंत निलंबित किया जाए।
उन पर कानूनी धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
मामले की निष्पक्ष विभागीय जांच की जाए।
समुदाय के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने तुरंत और कठोर कार्रवाई नहीं की, तो इससे पुलिस और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अविश्वास की खाई और गहरी होगी, जिसका सीधा असर कानून व्यवस्था पर पड़ेगा।