मदुरई,तमिलनाडु: हाईकोर्ट ने दी कड़ी चेतावनी —“मज़दूरी का पसीना सूखने से पहले वेतन दें”

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई बेंच ने मदुरई सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को उसके पूर्व स्थायी वकील पी. थिरुमलाई को लंबित बकाया पेशेवर शुल्क का भुगतान करने का कड़ा निर्देश दिया है। न्यायाधीश जी. आर. स्वामीनाथन ने 19 दिसंबर को अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि पेशेवर को समय पर भुगतान न करना न्याय और निष्पक्षता के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।

अदालत ने आदेश में कहा कि “पसीना सूखने से पहले मेहनताना दो”, मालूम हो कि ये पैगंबर मुहम्मद ﷺ का दुनिया के नाम एक निर्देश भी है। इसका सीधा मतलब है कि किसी भी काम का भुगतान तुरंत किया जाना चाहिए, बिना किसी विलंब या देरी के। न्यायालय ने इसे कानूनी और नैतिक कर्तव्य के रूप में माना।

पी. थिरुमलाई ने 1992 से 2006 तक 14 वर्षों तक निगम का स्थायी वकील के रूप में सेवा दी और करीब 818 मामलों में इसका प्रतिनिधित्व किया। उनके अनुसार कुल फीस ₹14.07 लाख में से केवल ₹1.02 लाख ही भुगतान हुआ, जबकि ₹13.05 लाख वर्षों से बकाया थे। यह मामला उन्होंने 2006 में दायर किया था।

न्यायालय ने निगम को निर्देश दिया कि वे दो महीने के भीतर सत्यापित बकाया राशि का भुगतान करें। अदालत ने यह भी कहा कि लंबे समय बाद चुनौती प्रस्तुत होने के कारण ब्याज नहीं दिया जाएगा।

अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि कई बार सरकारी संस्थाएं अति उच्च वकीलों को बड़ी फीस देती हैं, जबकि पुराने पेशेवरों का बकाया भुगतान टाल दिया जाता है। इसे “अजीब” और सरकारी धन का अनुचित उपयोग बताया गया।

साथ ही, मदुरै जिला लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को पीठासीन वकील को प्रमाणित कॉपियां जमा करने और सत्यापित शुल्क बिल तैयार करने का निर्देश भी दिया गया, ताकि निगम जल्द से जल्द भुगतान कर सके।

यह आदेश पेशेवरों के अधिकारों और समय पर भुगतान के मूल सिद्धांतों की न्यायालय द्वारा रक्षा का महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो विभागों और स्थानीय निकायों को चेतावनी भी देता है कि वे अनुबंधित सेवाओं के लिए नियमित और न्यायपूर्ण भुगतान सुनिश्चित करें।

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