चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस का हमला: सांसद ससीकांत सेंथिल ने कहा– ‘अजीब तरीके से हो रहा मतदाता सूची सुधार, 10-15% वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने का खतरा

कांग्रेस सांसद ससीकांत सेंथिल ने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया “बहुत ही अजीब तरीके से” और आयोग की खुद की गाइडलाइन के खिलाफ की जा रही है।

सेंथिल ने कहा कि SIR एक बेहद व्यापक प्रक्रिया है, जिसे जनगणना के बराबर बताया जा सकता है। इसमें घर-घर जाकर यह जांचना होता है कि कोई व्यक्ति उस पते पर “सामान्य रूप से निवास” करता है या नहीं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए तीन शर्तें हैं—भारतीय नागरिकता, 18 साल की उम्र और उस स्थान का निवास। लेकिन “सामान्य निवास” की परिभाषा अस्पष्ट है, जबकि देश में लाखों लोग काम के सिलसिले में जगह-जगह रहते हैं।

सांसद ने यह भी कहा कि BLOs को सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेना चाहिए, लेकिन मौजूदा प्रक्रिया में यह स्पष्ट नहीं है कि आगे क्या करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महीने के भीतर पूरी SIR प्रक्रिया पूरी करने का दबाव जनता और अधिकारियों दोनों के लिए मुश्किल खड़ा कर रहा है।

सेंथिल ने कहा कि पहले मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम हटाने के लिए डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता था। यह सिस्टम बार-बार चलाकर डुप्लीकेट की पहचान करता और BLO इसकी पुष्टि के बाद आवश्यक कार्रवाई करता। लेकिन बिहार में लोकसभा चुनाव के बाद SIR में यह सॉफ्टवेयर इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने रिपोर्टर्स कलेक्टिव का हवाला देते हुए कहा कि बिहार की मतदाता सूची में अब भी लगभग 14.5 लाख डुप्लीकेट नाम मौजूद हैं।

सेंथिल ने आरोप लगाया कि BLOs को बिना किसी प्रशिक्षण के रोज़ नए निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि केवल फॉर्म पर टिक करने के आधार पर निर्णय लेने से गरीब और वंचित वर्गों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।

सेंथिल ने कहा कि कई राज्यों की ड्राफ्ट मतदाता सूची पहले ही जारी हो चुकी है और उनका अनुमान है कि 10-15 प्रतिशत वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे जा सकते हैं।

सेंथिल ने चुनाव आयोग से मांग की कि वह SIR की पूरी प्रक्रिया पर पारदर्शी श्वेत पत्र जारी करे। इसमें स्पष्ट किया जाए कि डुप्लीकेशन कब और कैसे किया गया, क्या वर्तमान में किया जा रहा है, और किस नए ऐप या तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।

सांसद ने कहा, “देश को साफ-साफ जवाब चाहिए। मतदाता सूची में गड़बड़ी पर अब और चुप्पी नहीं चल सकती।”

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