कर्नाटक के बैंगलोर ज़िला के कोगिलु गाँव के शालिमार गार्डन क्षेत्र में 20 दिसंबर को संपन्न “एंटी-एन्क्रॉचमेंट ड्राइव” के दौरान अपने घरों से बेघर हुए 300 परिवारों के लिए कर्नाटक सरकार ने सोमवार को वैकल्पिक आवास देने की घोषणा की। यह कदम SDPI द्वारा लगातार चलाए गए विरोध और दबाव के बाद उठाया गया, जिन्होंने प्रभावित परिवारों के अधिकारों की आवाज उठाई और सरकारी कदमों की तीव्र आलोचना की।
मुख्यमंत्री सिद्धरामैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ये निर्माण अवैध थे और सरकारी भूमि पर बने थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोगिलु में हुए ध्वस्तीकरण के पीछे पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी और यह भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए आवंटित थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अवैध निर्माण स्थानीय राजस्व और नगर निगम अधिकारियों की जानकारी के बिना नहीं हो सकते। इस कारण संबंधित तहसीलदारों, शिरस्तेदारों और BBMP अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
मानवीय दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों की पहचान कर दो दिन के भीतर सूची प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री, आवास मंत्री बी. ज़मीर अहमद खान और स्थानीय विधायक के साथ विचार-विमर्श के बाद सरकार ने प्रभावित परिवारों को बैद्यप्पनहल्ली में वैकल्पिक आवास देने का निर्णय लिया। यह कोगिलु से लगभग 7 किमी दूर है।
बैद्यप्पनहल्ली में उपलब्ध 1,087 सरकारी घरों की कीमत लगभग 11.20 लाख रुपये प्रति यूनिट है। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 8.70 लाख रुपये तक का सब्सिडी मिलेगा, जबकि SC/ST वर्ग को 9.50 लाख रुपये तक का सब्सिडी प्रदान किया जाएगा। शेष राशि छोटे और सत्यापित ऋण के रूप में दी जाएगी।
आवास मंत्री ज़मीर अहमद खान ने कहा कि पात्र परिवारों का सत्यापन कर उन्हें 1 जनवरी से आवास उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “अवैध निर्माणों के बावजूद वैकल्पिक आवास केवल मानवीय आधार पर दिया जा रहा है और यह निर्णय विशेष रूप से इसी मामले पर लागू होगा।
वहीं SDPI ने ध्वस्तीकरण के बाद लगातार विरोध प्रदर्शन, धरने और ज्ञापन सौंपकर सरकार पर दबाव बनाया। पार्टी ने कहा कि महिलाओं, बच्चों और वृद्धों को रातोंरात बेघर किया गया और तुरंत आवास, मुआवजा तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। SDPI के नेताओं ने कहा कि “लगातार विरोध और प्रदर्शन के दबाव के बाद ही सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा।”
डी. के. शिवकुमार ने 29 दिसंबर को फैकिर कॉलोनी का दौरा किया और प्रभावित परिवारों से मिले। उन्होंने कहा कि भूमि को लगभग 9–10 साल पहले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट के लिए अधिसूचित किया गया था और यह स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रही थी। उन्होंने कई बार नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी और जोर देकर कहा कि कार्रवाई किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं थी।
शिवकुमार ने केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने बिना तथ्य जाने राजनीतिक बयान दिया और कर्नाटक के मामलों में हस्तक्षेप किया। विजयन ने फैकिर कॉलोनी और वसीम लेआउट के ध्वस्तीकरण की निंदा करते हुए इसे “बुलडोजर राज” और मुस्लिम विरोधी राजनीति बताया था।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई 20 दिसंबर की सुबह 4 बजे शुरू हुई थी। स्थानीय निवासियों ने मक्तूब को बताया कि वे 20–30 वर्षों से वहीं रह रहे हैं, उनके पास आधार, वोटर ID, PAN और राशन कार्ड हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ध्वस्तीकरण से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया।
कई परिवार, जिनमें वृद्ध और बच्चे शामिल थे, बिना भोजन, पानी और आश्रय के खुले में छोड़ दिए गए। कुछ ने आरोप लगाया कि उनके घरेलू सामान को तोड़ा-मरोड़ा गया और बिजली व इंटरनेट कनेक्शन एक दिन पहले ही काट दिया गया।
वहीं अधिकारी दावा करते हैं कि ये घर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए थे, एक तालाब के किनारे स्थित उर्दू सरकारी स्कूल के पास, और कई निवासी बाहरी राज्यों से आए थे—एक दावा जिसे स्थानीय निवासियों ने पूरी तरह खारिज किया।
