सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) ने वनेज़ुएला पर अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमलों और राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की कथित गैरकानूनी गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन बताया है।
SDPI के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद शफी ने जारी एक बयान में कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई न केवल यूएन चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण के देशों में हस्तक्षेप और साम्राज्यवादी सोच की भयावह मिसाल भी है। उन्होंने कहा कि यह हमला न तो अमेरिकी कांग्रेस की अनुमति से हुआ और न ही संयुक्त राष्ट्र की किसी वैध मंजूरी के तहत।
पार्टी के अनुसार, अमेरिकी सैन्य हमले में 150 से अधिक लड़ाकू विमानों ने वनेज़ुएला की राजधानी काराकस में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें राष्ट्रपति भवन मिराफ्लोरेस पैलेस भी शामिल था। हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। वनेज़ुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है।
SDPI ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तथाकथित “नार्को-टेररिज़्म” के नाम पर किया गया यह हमला झूठे बहानों पर आधारित है, जैसा कि अतीत में इराक युद्ध के दौरान देखा गया था। पार्टी का कहना है कि असल मकसद वनेज़ुएला के विशाल तेल संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना है।
बयान में बताया गया कि वनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जिसे 1976 में राष्ट्रीयकृत किया गया था। दशकों से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों ने पहले ही वनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है, और अब सैन्य हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ने की आशंका है। पार्टी ने चेतावनी दी कि इससे वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और क्षेत्रीय शरणार्थी संकट गहराने का खतरा है।
SDPI ने यह भी कहा कि वनेज़ुएला का फिलिस्तीन समर्थक रुख और ग़ाज़ा में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ खुला विरोध भी अमेरिका के साथ बढ़ते टकराव की एक अहम वजह रहा है। राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय और जवाबदेही की लगातार वकालत की है।
पार्टी ने भारत सरकार से अपील की है कि वह गैर-गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अपनी ऐतिहासिक भूमिका को निभाते हुए अमेरिकी हमले की स्पष्ट और बिना शर्त निंदा करे, राष्ट्रपति मदुरो की तत्काल रिहाई की मांग उठाए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का आपात सत्र बुलाने की पहल करे।
SDPI ने कहा कि यदि भारत इस मौके पर चुप रहता है तो यह उसकी उपनिवेश-विरोधी और शांति-समर्थक विरासत के खिलाफ होगा। पार्टी ने वनेज़ुएला की जनता और उन सभी देशों के साथ एकजुटता जताई जो साम्राज्यवादी दबाव और सैन्य आक्रामकता का विरोध कर रहे हैं।
