बिहार में अफ़सरशाही कटघरे में: डीजीपी–एसपी समेत 11 अधिकारियों पर मुकदमे की सुनवाई आज, ज़मीन विवाद ने लिया बड़ा मोड़

बिहार में एक ज़मीन विवाद ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार, नालंदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) भारत सोनी समेत बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के कुल 11 अधिकारियों के खिलाफ दर्ज दो परिवाद मामलों की प्रथम सुनवाई आज शुक्रवार को हिलसा स्थित प्रथम अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (ACJM) हेमंत कुमार की अदालत में होनी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे लेकर प्रशासनिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज़ है।

दोनों परिवाद 2 जनवरी 2026 को पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं नालंदा जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बकौर गांव निवासी सिकंदर पांडे द्वारा दायर किए गए थे। ये मामले एक पुराने पारिवारिक ज़मीन विवाद से जुड़े हैं, जो वर्तमान में पटना हाईकोर्ट में लंबित बताया जा रहा है। अधिवक्ता का आरोप है कि इसी विवाद के दौरान राजस्व और पुलिस अधिकारियों ने साजिश के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की।

परिवाद संख्या–4 में तत्कालीन अंचल अधिकारी अनुज कुमार, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी उपेंद्र कुमार तथा तत्कालीन अंचल राजस्व अधिकारी अनीश कुमार को आरोपी बनाया गया है।
परिवादी का आरोप है कि इन अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए मौजा बकौर की जमाबंदी रजिस्टर में छेड़छाड़ की और जाली दस्तावेज़ तैयार कर रिकॉर्ड में अवैध परिवर्तन किया।

सिकंदर पांडे का कहना है कि कथित जाली दस्तावेज़ों के आधार पर उन्हें उनके पिता कामता प्रसाद शर्मा की पैतृक संपत्ति से गैरकानूनी तरीके से बेदखल कर दिया गया। आरोप है कि इस दौरान उनका मकान तोड़ दिया गया और लाखों रुपये के घरेलू सामान की लूट भी की गई।

परिवाद संख्या–5 में इस्लामपुर थानाध्यक्ष अनिल कुमार पांडे, सहायक अवर निरीक्षक हेमंत कुमार, नालंदा एसपी भारत सोनी, पटना विधि-व्यवस्था एसपी, डीएसपी रामसेवक प्रसाद यादव, पुलिस महानिरीक्षक जितेंद्र राणा, डीजीपी विनय कुमार के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नामजद किया गया है।
इन सभी पर पद के दुरुपयोग, मिलीभगत और न्याय से वंचित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अधिवक्ता सिकंदर पांडे का कहना है “मेरी पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद अदालत में लंबित है। राजस्व अधिकारियों ने रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की, जबकि पुलिस और प्रशासन से मुझे कोई न्याय नहीं मिला। मजबूर होकर मुझे डीजीपी से लेकर एसपी तक के खिलाफ अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। मुझे उम्मीद है कि न्यायालय से इंसाफ मिलेगा।”

कानूनी जानकारों के अनुसार, आज की सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि मामले में आगे की प्रक्रिया क्या होगी—क्या आरोपों की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को समन जारी किए जाएंगे या किसी अन्य कानूनी बिंदु पर आदेश पारित किया जाएगा।
चूंकि मामला राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए इसे राज्य स्तर पर बेहद अहम और संवेदनशील माना जा रहा है।

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