झारखंड: गोड्डा में मॉब लिंचिंग,मुस्लिम समाज से आने वाली पंचायत समिति सदस्य के पति की पीट-पीटकर हत्या

झारखंड के गोड्डा जिले में मॉब लिंचिंग की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। रानीपुर गांव निवासी पप्पू अंसारी की बीते बुधवार को भीड़ द्वारा कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक की पत्नी पंचायत समिति की निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। घटना के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पप्पू अंसारी कानूनी रूप से मवेशी खरीद-फरोख्त का कार्य करते थे। बीते बुधवार को वे सीमावर्ती राज्य बिहार के बांका जिले के शाम मवेशी बाजार से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान गोड्डा जिले के मटिहानी गांव के पास उनकी गाड़ी को एक भीड़ ने रोक लिया। मृतक की पत्नी के अनुसार, भीड़ द्वारा अवैध रूप से चंदा मांगा गया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई।

बताया जाता है कि हमलावरों ने वाहन चालक को भी पकड़ने की कोशिश की, हालांकि वह किसी तरह मौके से भागने में सफल रहा। पप्पू अंसारी को भीड़ ने बेरहमी से पीटा। परिजनों का आरोप है कि उन पर लाठी, डंडे, फरसा और तीर से हमला किया गया। मारपीट इतनी निर्मम थी कि शव की पहचान करना मुश्किल हो गया। परिजनों के मुताबिक उनके दोनों पैर तोड़ दिए गए थे और जीभ काटे जाने का भी आरोप है। घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

पप्पू अंसारी परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और पांच छोटे बच्चे हैं। घटना की खबर फैलते ही राज्य ही नहीं, बल्कि देशभर में आक्रोश देखने को मिला और झारखंड की इंडिया गठबंधन सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने लगे।

घटना की निंदा करते हुए मानू छात्र संघ के पूर्व सचिव फैज़ान इक़बाल ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि “मोहब्बत की दुकान खोलने वाली सरकार के राज्य में मुसलमानों के साथ बर्बरतापूर्ण तरीक़े से लिंचिंग कर हत्या कर दी गई। क्या मुसलमानों के लिए मोहब्बत की दुकान नहीं है? आखिर कब तक यह सिलसिला खत्म होगा।”

वहीं, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने घटना को अमानवीय बताते हुए कहा कि “पप्पू अंसारी की जिस बर्बरतापूर्ण तरीके से हत्या की गई है, उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।”

इस मामले में एसडीपीआई झारखंड के अध्यक्ष हंजेला शेख ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “समाज में बढ़ती नफरत और कानून-व्यवस्था की विफलता के कारण इस तरह की घटनाएं बार-बार दोहराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि एसडीपीआई के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं—फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से त्वरित न्याय, एक करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी।

एसडीपीआई के प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द इन मांगों पर संज्ञान नहीं लिया और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी राज्यव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।

घटना के दो दिनों बाद आज ज़िला के उच्च अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय का भरोसा दिलाया है वही पुलिस घटना के बाद से तफ्तीश में जुटी है।

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