“भारत रत्न से पद्म श्री तक मतदाता सूची से नाम गायब” लोकतंत्र पर ‘डिलीशन’ का संगठित हमला: एसडीपीआई

देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर और सुनियोजित हमले के आरोप लगातार तेज़ होते जा रहे हैं। भारत रत्न से सम्मानित विभूतियों से लेकर पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हस्तियों तक मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की घटनाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया ने चुनावी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इसे नागरिक गरिमा और मताधिकार पर सीधा हमला बताया है।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद अशरफ़ ने गुजरात के जूनागढ़ से सामने आए ताज़ा मामले की कड़ी निंदा की है। यहां अस्सी वर्षीय लोक कलाकार मीर हाजीभाई कासमभाई जो हाजी रमाकडू के नाम से लोकप्रिय हैं का नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया गया। ढोलक, भजन, संतवाणी, ग़ज़ल और क़व्वाली के क्षेत्र में आजीवन योगदान देने वाले हाजी रमाकडू को सत्तहत्तरवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। इसके बावजूद उनके विरुद्ध प्रपत्र सात के अंतर्गत यह कहकर आपत्ति दर्ज कराई गई कि वे स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि उनके स्थानीय और सामाजिक संबंध सर्वविदित हैं। आरोप है कि यह आपत्ति एक स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के पार्षद द्वारा दाख़िल कराई गई। पार्टी ने इसे प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी और मानवीय गरिमा पर सुनियोजित हमला बताया है।

यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। गुजरात में ही पद्म श्री से सम्मानित प्रसिद्ध हास्य कलाकार शहाबुद्दीन राठौड़ को भी इसी तरह की आपत्तियों का सामना करना पड़ा। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से गायब पाया गया। पश्चिम बंगाल में भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन का नाम मतदाता सूची से हटाया गया। उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार विजेता मोहम्मद शमी ने भी पाया कि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है, जिससे प्रमुख मुस्लिम हस्तियों के साथ पक्षपात की आशंकाएं और गहरी हो गईं।

राजनीतिक जगत में भी ऐसे उदाहरण सामने आए हैं। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उपचुनाव में मतदान से वंचित किए जाने का आरोप लगाते हुए इसे राजनीतिक हस्तक्षेप बताया। इससे पहले पुणे में पूर्व वायुसेना प्रमुख प्रदीप वसंत नाइक की पत्नी का नाम भी मतदाता सूची से हटाया जा चुका है, जो चुनावी व्यवस्था में गहरी प्रणालीगत विफलताओं की ओर संकेत करता है।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया का आरोप है कि वर्ष दो हज़ार पच्चीस में शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का देशभर में बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। पार्टी के अनुसार, नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में प्रारूप मतदाता सूचियों से छह करोड़ पचास लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह आंकड़ा अठारह प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका सबसे अधिक असर प्रवासी श्रमिकों, आदिवासियों, दलितों, महिलाओं और विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय पर पड़ा है।

राजस्थान, बिहार, असम और उत्तर प्रदेश से आरोप सामने आए हैं कि बूथ स्तर के अधिकारियों पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा सामूहिक रूप से प्रपत्र सात के तहत आपत्तियां दाख़िल करने, मृत्यु या स्थानांतरण के झूठे दावे गढ़ने और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में बड़े पैमाने पर मतदाता नाम हटाने का दबाव बनाया गया। जयपुर में एक बूथ स्तर के अधिकारी द्वारा आत्महत्या की धमकी दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई, जब कथित तौर पर एक भाजपा विधायक ने मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने का दबाव डाला। बिहार के ढाका विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के लेटरहेड पर लगभग अस्सी हज़ार मुस्लिम मतदाताओं को बार-बार निशाना बनाए जाने के आरोप लगे हैं।

केरल में भी मौजूदा विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों से शिकायतें मिली हैं कि बिना समुचित सत्यापन और पूर्व सूचना के प्रपत्र सात के माध्यम से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मतदाता नाम हटाए गए। पार्टी का कहना है कि यह एक संगठित और सुनियोजित प्रयास है, जो केरल में निष्पक्ष, समावेशी और स्वतंत्र चुनावों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।

सबसे गंभीर स्थिति असम में बताई जा रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर आरोप है कि उन्होंने खुले तौर पर बंगाली मूल के मुसलमानों जिन्हें वे अपमानजनक शब्द “मिया” कहकर संबोधित करते हैं को मतदाता सूची से बाहर करने की मंशा ज़ाहिर की है। जनवरी दो हज़ार छब्बीस के अंत में दिए गए बयानों में उन्होंने पुनरीक्षण प्रक्रिया को “दबाव की रणनीति” बताया, समुदाय से बांग्लादेश में मतदान करने की बात कही और चार से पाँच लाख वोट रद्द होने की संभावना जताई। इन बयानों के बाद देशभर में विरोध और चुनावी हेरफेर के आरोप तेज़ हो गए हैं।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया ने मांग की है कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए, इसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा मताधिकार के दुरुपयोग में शामिल अधिकारियों और राजनीतिक तत्वों के खिलाफ कड़ी जवाबदेही तय की जाए। पार्टी ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने, विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन कराने और वैध मतदाताओं के नाम तत्काल बहाल करने की अपील की है।

पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र की बुनियाद मताधिकार पर टिकी होती है। यदि नागरिकों को सुनियोजित तरीके से वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। “हर नागरिक का मत बिना डर और बिना भेदभाव सुरक्षित रहना चाहिए,”।

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