नीट रेप कांड में तूफान: अमिताभ दास के दावे में नीतीश के बेटे निशांत का नाम आने के बाद अमिताभ गिरफतार, शिवानंद व तेजप्रताप ने दावे को बताया अविश्वसनीय

चर्चित नीट छात्रा मौत मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास पर पुलिस का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। शुक्रवार को पुलिस ने उनके पाटलिपुत्र स्थित अपार्टमेंट में छापेमारी की। हालांकि देर शाम तक उनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी, लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के बाद उन्हें अदालत में पेश किया जा सकता है।

चित्रगुप्त नगर थाना कांड संख्या 44/26 के तहत अमिताभ दास के खिलाफ अफवाह फैलाने, सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट करने और संवेदनशील मामले को प्रभावित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य संभावित साक्ष्य जब्त किए। कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जुड़े डेटा की जांच की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जब्त डिजिटल साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

छापेमारी के दौरान मीडिया से बातचीत में अमिताभ दास ने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल जनहित में सवाल उठाए थे और उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें एक साजिश के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है और वे अपने पास मौजूद साक्ष्य केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपेंगे।

6 जनवरी 2026 को पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में जहानाबाद की 16 वर्षीय छात्रा की तबीयत बिगड़ गई थी। 11 जनवरी को अस्पताल में उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन बाद में मेडिकल रिपोर्ट में यौन हिंसा की आशंका सामने आई। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया।

मामले की जांच के लिए 16 जनवरी को डीजीपी के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। बाद में जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई। सीबीआई ने 7एस/26 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

अमिताभ दास ने अपने बयानों में मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार का नाम लिया था और डीएनए जांच की मांग की थी। इस पर वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने आरोपों को पूरी तरह अविश्वसनीय बताया। वहीं तेज प्रताप यादव ने भी अमिताभ दास के बयानों को बेबुनियाद करार दिया।

नीट छात्रा मौत मामला अब कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसी की जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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