हैदराबाद में अलीज़े नजफ़ की पुस्तक “इंसानी नफ़्सियात की गिरहें” का गरिमामय लोकार्पण — मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर विशेष बल

प्रसिद्ध युवा लेखिका, कथाकार और शायरा अलीज़े नजफ़ की विचारोत्तेजक पुस्तक “इंसानी नफ़्सियात की गिरहें” का गरिमामय लोकार्पण हैदराबाद स्थित मीडिया प्लस सभागार में आयोजित एक प्रभावशाली समारोह में संपन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन पूर्व पुलिस प्रमुख सैयद अनवरुल हुदा के करकमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर शैक्षिक, सामाजिक और पत्रकारिता जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

समारोह को संबोधित करते हुए सैयद अनवारुलहुदा ने समाज में बढ़ती मानसिक व्याधियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगों पर समय रहते ध्यान देना और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की रक्षा करना आज की अत्यावश्यक आवश्यकता है। उनके अनुसार हृदय को वास्तविक शांति ईश्वर के स्मरण में प्राप्त होती है, और संकट की घड़ी में दो रकअत नफ़्ल अदा कर ईश्वर की ओर उन्मुख होना सर्वाधिक प्रभावी उपाय है। उन्होंने पश्चिमी समाजों का उदाहरण देते हुए कहा कि भौतिक सुविधाओं की प्रचुरता के बावजूद वहाँ मानसिक समस्याएँ व्यापक हैं, पारिवारिक व्यवस्था कमजोर होती जा रही है और सामाजिक माध्यमों के इस दौर में हजारों संबंधों के बावजूद मनुष्य गहन अकेलेपन का शिकार है।

पुस्तक के केंद्रीय व्यक्तित्व और प्रख्यात मनोवैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद क़ुतुबुद्दीन अबूशुजा ने कहा कि मानसिक रोगों से बचाव के लिए इस्लामी शिक्षाओं का अनुपालन अनिवार्य है। प्रेम का प्रसार, सलाम में पहल, संयमित आहार, अधिक चिंतन और धैर्य धारण करना मानसिक शांति के मूल सिद्धांत हैं। उन्होंने विश्वप्रसिद्ध मुक्केबाज़ मोहम्मद अली के साथ अपने दीर्घ संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि सीरत-ए-नबवी से परिचय के पश्चात उनके जीवन में उल्लेखनीय आध्यात्मिक परिवर्तन आया और मानवता के प्रति निष्काम प्रेम की भावना प्रबल हुई।

डॉ. शुजाअत अली ने कहा कि वर्तमान युग में मानसिक तनाव अत्यंत भयावह रूप ले चुका है। विशेषतः सेवा-निवृत्ति के पश्चात सामाजिक उपेक्षा के कारण अनेक लोग अवसाद से ग्रस्त हो जाते हैं। उन्होंने बल देकर कहा कि पारस्परिक स्नेह और सदाचार ही मानसिक संतुलन के प्रभावी साधन हैं।

उद्घाटन भाषण में डॉ. फ़ाज़िल हुसैन परवेज़ ने कहा कि डॉ. क़ुतुबुद्दीन का व्यक्तित्व समुदाय-सेवा की भावना से ओतप्रोत है। उन्होंने पुस्तक को एक उपयोगी चिकित्सकीय मार्गदर्शिका बताते हुए कहा कि भ्रम और संशय जैसी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

डॉ. तबरेज़ हुसैन ताज ने कहा कि डॉ. क़ुतुबुद्दीन की रचनाओं ने भय और निराशा से ग्रस्त व्यक्तियों के मन में सकारात्मक चिंतन को प्रोत्साहित किया है। सामाजिक कार्यकर्ता रफ़ीआ नुशीन ने कहा कि यह पुस्तक जन-भावनाओं की सच्ची प्रतिनिधि है। उनके अनुसार हमारे समाज में प्रत्येक सात में से एक व्यक्ति मानसिक तनाव से पीड़ित है, जिसे आशा और साहस की आवश्यकता है।

मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. महमूद सिद्दीकी ने कहा कि अनेक शारीरिक रोग मानसिक अवस्था से जन्म लेते हैं। उन्होंने घरों और संस्थानों में एक-दूसरे के योगदान को स्वीकारने और प्रोत्साहन देने की संस्कृति विकसित करने पर बल दिया, जिससे सकारात्मक वातावरण निर्मित हो सके।

समारोह में मौलाना सैयद रिफ़अत अली नक़्शबंदी व क़ादरी, जनाब मुश्ताक मलिक, जनाब के. एन. वासिफ, जनाब जे. एस. इफ़्तिख़ार, डॉ. अनीस मंज़ूर अहमद, जनाब सैयद इफ़्तिख़ार हाशमी, जनाब सैयद ज़ुहूरुद्दीन, मोहम्मद हुसामुद्दीन रियाज़, मोहम्मद अब्दुर्रशीद, डॉ. अज़हर अंसारी, डॉ. नाज़िम अली, मुजाहिद सिद्दीकी, शेख कलीम अल-उमूदी, मोहम्मद फ़ारूक़ अली सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

अंत में वक्ताओं ने एकमत से कहा कि “इंसानी नफ़्सियात की गिरहें” मात्र एक पुस्तक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक जागरण की गंभीर पहल है, जो समाज में आशा, प्रेम और संतुलन को सुदृढ़ करने का सशक्त संदेश देती है।

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