ईरान के बाद तुर्की पर इज़राइल की नज़र? “इस्लामी सैन्य गठबंधन बना तो चुप नहीं बैठेंगे”, बेनेट की चेतावनी से मध्य-पूर्व में हलचल

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच इज़राइल के पूर्व प्रधानमंत्री Naftali Bennett के एक बयान ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बेनेट ने कहा है कि यदि Türkiye क्षेत्र में इस्लामी राजनीतिक शक्तियों के इर्द-गिर्द किसी नए सैन्य या रणनीतिक गठबंधन के गठन की दिशा में आगे बढ़ता है, तो भविष्य में उसका टकराव Israel के साथ हो सकता है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब इज़राइल और Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे मध्य-पूर्व में सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। क्षेत्र के कई देश मौजूदा हालात को लेकर अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार कर रहे हैं।

हम चुप नहीं बैठेंगे”: बेनेट

एक साक्षात्कार में बेनेट ने कहा कि यदि इज़राइल को यह महसूस होता है कि उसे क्षेत्रीय स्तर पर रणनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की जा रही है, तो वह “चुपचाप नहीं बैठेगा।”

उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसे गठबंधन को, जो इस्लामवादी राजनीतिक शक्तियों के इर्द-गिर्द खड़ा किया जाए, इज़राइल अपनी सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरे के रूप में देखेगा। बेनेट के अनुसार, यदि अंकारा ऐसा राजनीतिक-सैन्य ब्लॉक बनाने की कोशिश करता है जो इज़राइल विरोधी ताकतों को एकजुट करे, तो इज़राइल को उसके खिलाफ सैन्य विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है।

तुर्की के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता

बेनेट ने तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan को “कुशल और खतरनाक प्रतिद्वंद्वी” बताते हुए कहा कि अंकारा क्षेत्रीय राजनीति में अपना प्रभाव तेजी से बढ़ा रहा है।

इज़राइल की चिंता यह है कि तुर्की Qatar और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ मिलकर एक संभावित “सुन्नी धुरी” (Sunni Axis) बनाने की दिशा में काम कर सकता है, जिसमें कुछ इस्लामी संगठनों और राजनीतिक आंदोलनों को भी समर्थन मिल सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि इज़राइल लंबे समय से ईरान और उसके सहयोगी संगठनों को अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती मानता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में तुर्की की सक्रिय क्षेत्रीय भूमिका ने कुछ इज़राइली रणनीतिक हलकों में नई चिंताएँ पैदा की हैं।

ग़ज़ा मुद्दे पर बढ़ा कूटनीतिक तनाव

पिछले कुछ वर्षों में तुर्की और इज़राइल के संबंध लगातार उतार-चढ़ाव से गुज़रे हैं, विशेष रूप से Gaza Strip में इज़राइली सैन्य कार्रवाइयों को लेकर।

तुर्की ने ग़ज़ा में इज़राइल की कार्रवाई की खुलकर आलोचना की है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके खिलाफ कूटनीतिक तथा कानूनी दबाव बनाने की कोशिश की है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अंकारा अब केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक, कानूनी और राजनीतिक स्तर पर भी इज़राइल को चुनौती देने की रणनीति अपना रहा है।

NATO सदस्यता से प्रत्यक्ष टकराव की संभावना कम

हालांकि कई सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इज़राइल और तुर्की के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव की संभावना फिलहाल कम है।

तुर्की NATO का एक प्रमुख सदस्य है और उसकी सेना क्षेत्र की सबसे बड़ी सेनाओं में गिनी जाती है। ऐसे में किसी भी प्रत्यक्ष संघर्ष के व्यापक अंतरराष्ट्रीय परिणाम हो सकते हैं।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि दोनों देशों के बीच कोई साझा सीमा नहीं है, जिससे किसी संभावित सैन्य कार्रवाई को अंजाम देना रणनीतिक रूप से बेहद जटिल हो जाता है।

बदलते शक्ति समीकरण

मध्य-पूर्व में जारी संकट के बीच बेनेट का यह बयान इस ओर संकेत करता है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति में नए शक्ति-संतुलन उभर सकते हैं।

यदि तुर्की किसी नए क्षेत्रीय गठबंधन को आगे बढ़ाता है और इज़राइल उसे अपने लिए रणनीतिक खतरे के रूप में देखता है, तो यह प्रतिस्पर्धा मध्य-पूर्व की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को गहराई से प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल तुर्की सरकार की ओर से बेनेट के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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