वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। मध्य‑पूर्व में यूएस और इज़राइल के ईरान पर बढ़ते सैन्य दबाव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग, Strait of Hormuz, को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और बाजार में भावों में अस्थिरता बढ़ गई है।
बहरीन में स्थित Bapco तेल रिफाइनरी पर हाल ही में हुए हमलों की तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि संघर्ष अब सीधे ऊर्जा अवसंरचना तक पहुँच चुका है। जलडमरूमध्य के बंद होने से रोजाना 20 मिलियन बैरल तेल का परिवहन ठप हो गया है, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है। कई देशों में तेल उत्पादन घटा या बंद हो गया क्योंकि जहाज़ों को लोडिंग की अनुमति नहीं मिल रही।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए International Energy Agency (IEA) के 32 सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक आपात तेल रिलीज़ करने का निर्णय लिया। कुल 400 मिलियन बैरल तेल को सदस्य देशों के भंडार से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। IEA के कार्यकारी निदेशक फैतिह बियोल ने कहा कि यह कदम बाज़ार में अस्थिरता को कम करने और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तेल Hormuz मार्ग से बिछड़ रही आपूर्ति का लगभग 20 दिनों तक का विकल्प प्रदान करेगा।
तेल बाजारों में यह संकट भावों पर भी सीधे असर डाल रहा है। Brent Crude का भाव युद्ध की शुरुआत के बाद $120 प्रति बैरल तक पहुँच गया था, जबकि IEA की घोषणा के बाद भाव थोड़े कम होकर $85–$90 के स्तर पर आ गए। विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल अस्थायी राहत है, और यदि संघर्ष जारी रहा, तो तेल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं।
सिर्फ तेल बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ भी इस संकट से प्रभावित हो रही हैं। महंगी ऊर्जा के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें ऊपर जाएँगी। तेल आयात करने वाले देशों की ऊर्जा सुरक्षा भी संकट में है। भारत ने इस स्थिति को देखते हुए रूस से लगभग 30 मिलियन बैरल तेल खरीदने का निर्णय लिया है, जिसे अमेरिका की 30‑दिन की अस्थायी छूट के तहत अनुमति दी गई है।
विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि यदि युद्ध लंबे समय तक चलता रहा और Hormuz Strait पर अवरोध जारी रहा, तो तेल की कीमतें $150 या उससे अधिक तक जा सकती हैं। इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक विकास सुस्त पड़ सकता है और ऊर्जा‑निर्भर क्षेत्रों में मंदी की आशंका बढ़ सकती है।
IEA की यह आपात रिलीज़ वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक अस्थायी राहत का संदेश है, लेकिन विशेषज्ञ इसे संघर्ष के दीर्घकालिक प्रभावों को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं मान रहे। विश्व के प्रमुख आर्थिक और ऊर्जा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वर्तमान संकट केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक उद्योग, व्यापार और उपभोक्ता मूल्य स्तर पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।