मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री से मिले सम्राट चौधरी, बंगाल चुनाव के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना पर बढ़ी सियासी हलचल

बिहार की नई सरकार बनने के बाद राज्य की राजनीति में तेजी से हलचल बढ़ गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहली औपचारिक मुलाकात की। यह भेंट 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई, जिसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके गहरे सियासी और प्रशासनिक मायने निकाले जा रहे हैं।

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ था। इसके बाद यह पहला अवसर है जब मुख्यमंत्री ने सीधे प्रधानमंत्री से मुलाकात की है। इस मुलाकात को बिहार और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में बिहार मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर भी चर्चा की संभावना रही। सरकार गठन के कई दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो सका है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। अंदरूनी जानकारी के मुताबिक, संभावित मंत्रियों की सूची, विभागों के बंटवारे और सहयोगी दलों के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। खासकर गठबंधन सरकार में संतुलन साधना नए मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

चर्चा है कि नई सरकार में भाजपा कोटे से लगभग 17 मंत्री, जदयू से 15 मंत्री, एलजेपी (रामविलास) को 2 पद, जबकि हम और आरएलएम को 1-1 मंत्री पद मिल सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय दिल्ली स्तर पर ही लिया जाएगा।

भाजपा संगठन के कई वरिष्ठ नेता इन दिनों पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, जिसके चलते कैबिनेट विस्तार में देरी को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि 4 मई के बाद कभी भी मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा हो सकती है।

फिलहाल राज्य सरकार सीमित मंत्रियों के साथ काम कर रही है, जिससे कई विभागों में फाइलें लंबित हैं और प्रशासनिक गति प्रभावित हो रही है। ऐसे में जल्द कैबिनेट विस्तार को जरूरी माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी और प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात भले ही औपचारिक बताई जा रही हो, लेकिन इसके सियासी संकेत साफ हैं—बिहार में नई सरकार के साथ केंद्र का समन्वय अब और मजबूत होने की दिशा में बढ़ रहा है।

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