पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद CAPF तैनाती पर SDPI का हमला, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद केंद्रीय बलों की तैनाती और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संघीय ढांचे के लिए चिंताजनक बताया है।

पार्टी के राष्ट्रीय सचिव या मोहिद्दीन ने बयान जारी कर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा यह घोषणा कि चुनाव के बाद 60 दिनों तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) पश्चिम बंगाल में तैनात रहेंगे, राजनीतिक मंशा को दर्शाता है। SDPI का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग का अधिकार केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने तक सीमित है, जो परिणाम घोषित होने तक ही लागू होता है।

SDPI ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के अंतिम दिन इस तरह का बयान देकर मतदाताओं को प्रभावित करने और केंद्र की शक्ति का प्रदर्शन करने की कोशिश की गई है। पार्टी ने यह भी कहा कि विपक्षी कार्यकर्ताओं को “गुंडा” बताने और चुनाव बाद कार्रवाई की चेतावनी देने जैसे बयान चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।

इसके साथ ही SDPI ने दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में अजय पाल शर्मा की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल के दौरान अपनी आक्रामक पुलिसिंग शैली के लिए चर्चित रहे शर्मा की नियुक्ति निष्पक्षता के बजाय डर और दबाव का माहौल पैदा कर सकती है।

SDPI ने आरोप लगाया कि एक उम्मीदवार के परिवार को खुलेआम चेतावनी देने जैसी घटनाएं चुनाव आयोग की तटस्थता पर सवाल खड़े करती हैं। पार्टी का मानना है कि भाजपा शासित राज्य से ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति से चुनावी प्रक्रिया पर पक्षपात का संदेह गहराता है।

पार्टी ने मांग की है कि चुनाव आयोग 4 मई के बाद केंद्रीय बलों की तैनाती की अवधि, उनकी शक्तियों और कमांड संरचना को स्पष्ट करे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी पर्यवेक्षक पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से कार्य करें।

SDPI ने अंत में कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब केंद्रीय एजेंसियां राजनीतिक दबाव के उपकरण न बनें। पार्टी ने सभी लोकतांत्रिक ताकतों से अपील की है कि वे संघीय ढांचे और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता की रक्षा के लिए आगे आएं।

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