बरेली ट्रेन हादसे पर उठा सवाल: “मौलाना तौसीफ रज़ा की मौत हादसा नहीं”! SDPI ने की SIT जांच की मांग, परिजनों के आरोपों ने बढ़ाई साजिश की आशंका

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) उत्तर प्रदेश ने बरेली कैंट रेलवे स्टेशन के पास हुई मौलाना तौसीफ रज़ा मजहरी की मौत को संदिग्ध बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि बिना पूरी जांच के इसे “सिर्फ हादसा” करार देना न्याय के साथ अन्याय होगा।

बिहार के किशनगंज (ठाकुरगंज) निवासी 30 वर्षीय मौलाना तौसीफ रज़ा मजहरी सीवान के एक मदरसे में शिक्षक थे। वह 26-27 अप्रैल की रात बरेली में आयोजित “उर्स-ए-ताज-उश-शरिया” कार्यक्रम में शामिल होने के बाद ट्रेन से घर लौट रहे थे। इसी दौरान बरेली कैंट रेलवे स्टेशन के निकट चलती ट्रेन से गिरने से उनकी मौत हो गई।

मृतक के परिजनों ने घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि घटना से कुछ देर पहले मौलाना तौसीफ ने अपनी पत्नी को फोन कर बताया था कि ट्रेन में कुछ लोग उन्हें “चोर” कहकर पीट रहे हैं। परिजनों का यह भी कहना है कि वीडियो कॉल के जरिए उन्होंने मारपीट की घटना देखी थी।

परिवार ने आरोप लगाया है कि मौलाना को उनकी धार्मिक पहचान दाढ़ी और टोपी की वजह से निशाना बनाया गया और बाद में चलती ट्रेन से धक्का दे दिया गया।

हालांकि स्थानीय पुलिस और रेलवे प्रशासन ने शुरुआती जांच में इसे दुर्घटना बताया है। अधिकारियों के अनुसार अत्यधिक गर्मी के कारण वह खिड़की के पास सो रहे होंगे और संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गए।

SDPI ने दोनों दावों में विरोधाभास बताते हुए कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराई जानी चाहिए। पार्टी ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की फॉरेंसिक जांच, ट्रेन में मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों से पूछताछ तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

SDPI उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव मोहम्मद नदीम ने कहा, “सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि इस संबंध में रेल मंत्री को ज्ञापन भेजा गया है।

पार्टी ने मामले की प्रतियां राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, जीआरपी उत्तर प्रदेश और मुरादाबाद मंडल के DRM को भी भेजी हैं।

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