देश में शैक्षणिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर उठे विवादों के बीच सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (Social Democratic Party of India) ने नीट यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद कथित सांप्रदायिक हिंसा के मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पार्टी ने दोनों ही मामलों में निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
पेपर लीक से परीक्षा प्रणाली पर सवाल
पार्टी की राष्ट्रीय सचिव सादिया सईदा ने जारी बयान में कहा कि बड़े पैमाने पर पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों के खुलासे के बाद NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द किया जाना देश की परीक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार की “प्रणालीगत विफलता” बताया।
बयान में कहा गया कि देशभर के 22 लाख से अधिक छात्रों ने वर्षों की मेहनत, आर्थिक संघर्ष और मानसिक दबाव के बीच परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक ने उनके भविष्य को अनिश्चितता और निराशा में धकेल दिया।
SDPI ने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं से स्पष्ट है कि परीक्षा व्यवस्था में गहरी जड़ें जमा चुका भ्रष्टाचार और लापरवाही गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। पार्टी ने मांग की कि पूरे मामले की समयबद्ध और पारदर्शी जांच हो तथा दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।
पश्चिम बंगाल में हिंसा के आरोप
दूसरी ओर, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव या मुहिउद्दीन ने पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद कथित सांप्रदायिक हिंसा और हमलों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कुछ तत्वों द्वारा राजनीतिक ध्रुवीकरण और हिंसा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
बयान में कहा गया कि विभिन्न जिलों से मिली रिपोर्टों के अनुसार, विजय जुलूसों की आड़ में धार्मिक स्थलों, अल्पसंख्यक समुदाय और उनकी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। पार्टी ने हगली में एक पंचायत सदस्य की हत्या सहित कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए इसे “चुनाव बाद हिंसा का गंभीर पैटर्न” बताया।
SDPI ने यह भी दावा किया कि 4 से 7 मई के बीच कई जिलों में दर्जनों हिंसक घटनाएं हुईं, जिनमें घरों और दुकानों पर हमले तथा धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं शामिल हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
पार्टी ने दोनों मामलों में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। SDPI ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इससे न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि सामाजिक सौहार्द पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
