मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल नहीं किए जाने पर जताई गहरी चिंता

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार सरकार द्वारा “सेवन रिजॉल्व्स-3 (2025-30)” योजना के तहत स्थापित किए जा रहे 208 नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय के लिए एक भी असिस्टेंट प्रोफेसर पद निर्धारित नहीं किए जाने पर गहरी चिंता और अफसोस व्यक्त किया है।

संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बिहार उन महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है जहां उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है और वर्षों से विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में उर्दू की पढ़ाई की समृद्ध परंपरा रही है। इसके बावजूद नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय के लिए एक भी पद निर्धारित न किया जाना उर्दू भाषा, उससे जुड़े छात्रों, शोधार्थियों और योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय के समान है।

एमएएफ ने कहा कि यह केवल एक भाषा का मुद्दा नहीं बल्कि समान शैक्षणिक अवसर, भाषाई प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है। संगठन के अनुसार हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र उर्दू विषय से स्नातक, स्नातकोत्तर, नेट तथा पीएचडी की डिग्रियां प्राप्त करते हैं, लेकिन नई नियुक्तियों में उर्दू को पूरी तरह नजरअंदाज कर देना हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

संगठन ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) मातृभाषाओं और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं प्रोत्साहन पर विशेष जोर देती है। ऐसे में उर्दू को शामिल नहीं करना नई शिक्षा नीति की मूल भावना के भी विपरीत है। एमएएफ ने सरकार से मांग की कि नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय के लिए पर्याप्त संख्या में असिस्टेंट प्रोफेसर पद सृजित किए जाएं तथा इस निर्णय की तत्काल समीक्षा की जाए।

एमएएफ ने आगे कहा कि उर्दू बिहार की साझा सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में उसकी उचित भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।

संगठन ने बिहार सरकार और शिक्षा विभाग से यह भी मांग की कि उर्दू शिक्षकों, शिक्षाविदों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया जाए ताकि इस मुद्दे का न्यायपूर्ण समाधान निकाला जा सके।

अंत में संगठन ने कहा कि यदि इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया तो राज्यभर में उर्दू छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के बीच असंतोष और बढ़ सकता है।

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल नहीं किए जाने पर जताई गहरी चिंता

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