
दिल्ली (इंसाफ़ टाइम्स डेस्क) “बुलडोजर न्याय पर रोक सम्बंधी सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य” यह बात आल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस राजस्थान के प्रदेश कन्वीनर एडवोकेट अंसार इंदौरी ने प्रेस को जारी बयान में कही है
AILAJ के प्रदेश कन्वीनर एडवोकेट अंसार इंदौरी ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि आवास परिवार का मौलिक अधिकार है जिससे उसे कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना वंचित नहीं किया जा सकता
इसी संबंध में उन्होंने आगे कहा है की किसी व्यक्ति के आरोपित अथवा दंडित हो जाने पर आप उसके परिवार को सामूहिक तौर पर दंडित नहीं कर सकते, सुप्रीम कोर्ट ने कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा है कि कार्यपालिका न्यायपालिका की भूमिका नहीं निभा सकती। सर्वोच्च न्यायालय ने कानून के राज के महत्व पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि कानून का राज मनमानी कार्रवाही करने की अनुमति नहीं देता। इसी संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी संपत्ति नोटिस के बिना नहीं गिराई जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यपालिका की मनमानी तथा गैर कानूनी कार्रवाही रोकने के लिए अवैध रूप से विध्वंस करने वाले अधिकारियों को विभागीय, आपराधिक तथा आर्थिक रूप से दंडित करने का आदेश भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में किसी भी प्रकार के विध्वंस करने के संबंध में दिशा निर्देश दिए हैं जिनका अनुपालन करना अनिवार्य है। इसका अनुश्रवण करने के लिए संबंधित जिलाधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट है कि बुलडोज करने की कार्रवाई गैरसंवैधानिक थी। इसलिए इस तरह की सभी कार्रवाई की जांच कराकर जबावदेही तय करेगी और इसे करने वाले दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाएगा। साथ ही गैर कानूनी कार्रवाही के मामलों में मकान मालिकों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने यह आशा की है कि सुप्रीम के उक्त निर्णय का सरकारे सम्मान करेगी और देश में बुलडोजर राज की पूर्णतया समाप्ति कर कानून के राज की स्थापना करेगी!