
दिल्ली (इंसाफ़ टाइम्स डेस्क) छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के गृह विभाग ने नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में सक्रिय आदिवासी संगठन “मूलनिवासी बचाव मंच” को गैर कानूनी बताते हुए एक साल के लिए प्रतिबंधित घोषित कर दिया है
छत्तीसगढ़ के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में दावा किया गया है कि “‘मूलवासी बचाओ मंच’ माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों और सुरक्षा बलों के संचालन के लिए स्थापित शिविरों का लगातार विरोध करता रहा है, इसके अलावा संगठन इन गतिविधियों के खिलाफ जनता को भड़काता रहा है”
आदेश में कहा गया है कि “संगठन ने न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप किया है, कानूनी रूप से स्थापित संस्थाओं की अवज्ञा को बढ़ावा दिया है, जिसके कारण सार्वजनिक व्यवस्था और शांति में गड़बड़ी हुई है, जिससे नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है, इन कार्यों को राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक माना गया है, छत्तीसगढ़ विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2005 (क्रमांक 14, 2006) की धारा 3, उपधारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार ने ‘मूलवासी बचाओ मंच’ को इस अधिसूचना की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए ‘गैरकानूनी’ संगठन घोषित किया है”
सरकार के इस फैसले का विभिन्न आदिवासी संगठनों और कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया है,बस्तर के आदिवासी कार्यकर्ताओं का कहना है कि “यह प्रतिबंध जल, जंगल, जमीन के मुद्दों पर संगठन की सक्रियता को रोकने का प्रयास है”
आदिवासी युवाओं की इस संगठित व सक्रिय संगठन पर प्रतिबंध से युवाओं में बड़ा रोष पाया जा रहा है,खबर है कि बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ में प्रतिबंध के खिलाफ़ आंदोलन करने की तैयारी आदिवासी संगठनों द्वारा किया जा रहा है