
पटना (इंसाफ़ टाइम्स डेस्क) भीम-कोरेगांव एल्गर परिषद मामले में गिरफ़्तार रिसर्चर रोना विल्सन और एक्टिविस्ट सुधीर धावले को मुंबई हाई कोर्ट से ज़मानत मिल गई है,उन्हें एक लाख रूपये के मुचलके पर ज़मानत दी गई है
मालूम हो कि विल्सन और धावले उन 16 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में से है जिन्हें भीमा कोरेगांव एल्गर परिषद मामले में इस आरोप के तहत गिरफ़्तार किया गया था कि “वे प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से संबंध रखते हैं और देश के खिलाफ़ युद्ध छेड़ने की कोशिश में शामिल थे”
मुंबई हाई कोर्ट ने ज़मानत देते हुए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न करने, विशेष अदालत की अनुमति के बिना मुंबई नहीं छोड़ने, पासपोर्ट जमा करने और अभियोजन पक्ष को मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने तथा मुंबई में एनआईए मुख्यालय में प्रत्येक सोमवार को उपस्थिति दर्ज कराने का आदेश दिया
हाई कोर्ट बेंच ने ज़मानत देते हुए कहा कि “वे 2018 से जेल में हैं, यहां तक कि मामले में आरोप भी तय नहीं किए गए हैं, अभियोजन पक्ष ने 300 से अधिक गवाहों का हवाला दिया, इस प्रकार निकट भविष्य में मुकदमे के समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है”
भीमा कोरेगांव मामले में सुधा भारद्वाज,वरवरा राव,गौतम नौलक्खा,वर्णन फरेरा,आनंद तेलतुमरे को भी ज़मानत मिल चुकी है