मुंबई में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की गैर मुस्लिम बुद्धिजीवियों से अहम मुलाकात: वक्फ कानून की खामियां उजागर, गलतफहमियां दूर

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हालिया वक्फ संशोधन कानून के संदर्भ में मुंबई के होटल साहिल में एक विशेष बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए गैर मुस्लिम बुद्धिजीवियों, वकीलों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। बैठक को बोर्ड के महासचिव मौलाना फजलुर रहीम मुजद्दीदी और राष्ट्रीय प्रवक्ता क़ासिम रसूल इलयास ने संबोधित किया।

बैठक की शुरुआत मौलाना मोजद्दिदी के भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने पहलगाम घटना की निंदा करते हुए कश्मीरी मुसलमानों की इंसानियत की सराहना की। उन्होंने इस घटना के बाद देशभर में मुसलमानों के खिलाफ फैलाई जा रही नफरत और मीडिया के पक्षपाती रवैये की आलोचना भी की।

इसके बाद क़ासिम रसूल इलयास ने वक्फ संशोधन कानून की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि यह कानून न केवल मुसलमानों के खिलाफ है बल्कि भारत के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विरुद्ध है। उन्होंने इसे ‘फूट डालो और राज करो’ की औपनिवेशिक नीति का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य समाज को आपस में बांटना और अल्पसंख्यकों को कमजोर करना है।

उन्होंने उपस्थित गैर मुस्लिम मेहमानों के सवालों के जवाब दिए और उनके मन में सरकार के प्रचार के कारण पनपी गलतफहमियों को तर्कों के साथ दूर किया। कई प्रतिभागियों ने माना कि उन्हें इस कानून की वास्तविकता की जानकारी नहीं थी और इस बैठक ने उनकी सोच को बदला है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के साथ खड़े रहने और साझा संघर्ष का भरोसा दिलाया।

बैठक का संचालन महाराष्ट्र वक्फ बचाओ समिति के संयोजक मौलाना महमूद अहमद खां दरियाबादी ने किया। उन्होंने कहा कि यह कानून मुसलमानों के साथ तो अन्याय है ही, साथ ही भारत के संविधान के भी खिलाफ है। आज मुसलमानों के साथ हुआ अन्याय कल अन्य अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों के साथ भी हो सकता है।

बैठक में मौजूद ईसाई, सिख, बौद्ध और दलित नेताओं ने भी अपने-अपने समुदायों के साथ हो रहे अन्याय का जिक्र किया और मुस्लिम समाज से सहयोग की अपील की। बोर्ड ने उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। अंत में तय किया गया कि देश के तमाम अल्पसंख्यकों और कमजोर तबकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा।

प्रमुख गैर मुस्लिम प्रतिभागी

एडवोकेट श्रीश माने (भारतीय बहुजन एलायंस), सिंधिया घोकले (नारी अत्याचार विरोधी मुहिम), स्टेनली फर्नांडीस (इंटरफेथ डायलॉग कमेटी), अर्जुन डांगले, पूर्व विधायक सुनील जेसवाल, संतोष पाटिल (भारत जोड़ो अभियान), मनाली गावली (चर्मकार संगठन), हरविंदर सिंह (राष्ट्रीय सिख मोर्चा), कमाक्षी भाटे, ललिता देवनाली (पीयूसीएल), जनार्दन जांगले, अरविंद सोंटाके (संविधान समिति बचाओ) सहित अन्य संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी।

बोर्ड की ओर से शामिल प्रमुख प्रतिनिधि

मुंबई से मौलाना सईदुर्रहमान फारूकी, फरीद शेख, सलीम मोटरवाला, हाफिज इकबाल चूनावाला और महाराष्ट्र वक्फ बचाओ समिति से मौलाना एजाज कश्मीरी, मौलाना रूह ज़फर, मुफ्ती हुदैफा क़ासमी, मौलाना असीद क़ासमी, मौलाना अब्दुल जलील सलफी, मौलाना बुरहानुद्दीन क़ासमी, शाकिर शेख, हमायूं शेख आदि मौजूद रहे।

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