
दिल्ली (इंसाफ़ टाइम्स डेस्क) राजस्थान के अजमेर में स्थित प्रसिद्ध सूफ़ी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के मज़ार व दरगाह के महादेव मंदिर की जगह पर होने के दावे और इसकी जांच की मांग वाले याचिका को अजमेर सिविल कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से यह याचिका दायर की गई थी,सिविल कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय,दरगाह कमिटी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस भेजा है,मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी
मामले पर हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा कि “आप अजमेर दरगाह के आसपास घूमेंगे तो देखेंगे कि बुलंद दरवाजे पर हिन्दू परंपरा की नक्काशी की गई है, वहीं जहां शिव मंदिर होता है वहां झरना,पेड़ आदि जरूर होते हैं, पानी वहां जरूर होता है, ऐसे में पुरातत्व विभाग से भी अपील है कि वे यहां जांच करें”
मजलिसे सज्जादगन के चीफ़ सरवर चिश्ती ने कहा कि “पहले से इस तरह की बयानबाजी चलती आ रही है,अजमेर की दरगाह के देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में लाखों-करोड़ों अनुयायी हैं, इसी साल 22 जून को मोहन भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद में शिवलिंग तलाश न करें,द प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991कहता है कि बाबरी मस्जिद के अलावा किसी भी धार्मिक स्थल में कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जाएगी,ऐसा करना देश की एकता और सहिष्णुता पर खतरा पैदा करेगा”