अलीगढ़ लिंचिंग कांड: AIMIM के अकील अहमद, SDPI के महेन्द्र सिंह और IDRF के डॉ. फैज़ुल हसन ने उठाई आवाज़, पीड़ित मुस्लिम व्यापारियों को इंसाफ़ दिलाने की मांग तेज

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

अलीगढ़ ज़िले के अतरौली क्षेत्र में 24 मई को हुई लिंचिंग की भयावह घटना ने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। चार मुस्लिम व्यापारियों — अकील, अरबाज़, कदीम और एक अन्य अकील पर तथाकथित गौरक्षकों द्वारा किए गए हमले के खिलाफ अब विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

मंगलवार को AIMIM के वरिष्ठ नेता अकील अहमद की अगुवाई में, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता अलीगढ़ एसपी कार्यालय पहुंचे और ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने नारेबाज़ी करते हुए आरोप लगाया कि इन मुस्लिम व्यापारियों से “गुंडा टैक्स” की मांग की गई थी, और इंकार करने पर उन्हें बेरहमी से पीटा गया। पीड़ित सभी व्यापारी अतरौली के कसाबान मोहल्ले के निवासी हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गौरक्षा के नाम पर एक संगठित वसूली गैंग काम कर रहा है, जिसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

सोषल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) उत्तरप्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष महेन्द्र सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज जाकर घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में राज्य महासचिव डॉ. सरवर अली, सचिव हारून चौधरी, हापुड़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रहीमुद्दीन और गाज़ियाबाद ज़िला कार्यकारिणी सदस्य इमरान तोमर शामिल थे।

महेंद्र सिंह ने कहा, “यह घटना न सिर्फ़ एक आपराधिक हमला है बल्कि धार्मिक नफ़रत फैलाने की सुनियोजित साज़िश है। पुलिस को सभी दोषियों पर रासुका लगाने में देर नहीं करनी चाहिए।”

छात्रसंगठन MSO के अधीन काम कर रही मानवाधिकार संस्था IDRF के डेलीगेशन ने SSP श्री संजीव सुमन से मुलाकात की। डेलीगेशन की अगुवाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष डॉ. फैज़ुल हसन ने की। उन्होंने चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा जिसमें मुख्य मांगे थीं:

1.पीड़ितों के खिलाफ दर्ज फर्ज़ी एफआईआर को तत्काल रद्द किया जाए क्योंकि FSL रिपोर्ट में गौमांस की पुष्टि नहीं हुई है।
2.सभी नामजद आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
3.रासुका के तहत सख़्त कार्रवाई की जाए ताकि ऐसे गुंडों को सबक मिले।
4.घटना की गहराई से जांच कर साजिशकर्ताओं को भी गिरफ़्तार किया जाए।

डॉ. फैज़ुल हसन ने कहा, “यह मामला सिर्फ़ चार लोगों का नहीं है, यह पूरे समाज की सुरक्षा और इंसाफ़ की लड़ाई है।

एसएसपी संजीव सुमन ने प्रतिनिधिमंडलों को भरोसा दिलाया कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और पूरी निष्पक्षता से कार्रवाई की जाएगी।

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