अलवर,राजस्थान के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के अंतिम चरण में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और मतदाताओं का आरोप है कि 1397 मतदाताओं जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं के खिलाफ अचानक आपत्तियां दर्ज कर उन्हें मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई, जबकि वे सभी जीवित हैं।
रामगढ़ के ऊंटवाल गांव के पंचायत समिति प्रधान नसरू खान के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक जत्था SDM कार्यालय पहुंचा और ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 106 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां उसी गांव के नवाब के नाम से दर्ज कराई गईं, जबकि नवाब का कहना है कि उसने कभी कोई आवेदन नहीं किया!
ग्रामीणों ने बताया कि कई लोगों के बाबत आपत्तियों में उन्हें मृतक या प्रवासी बताया गया, जबकि वे सभी जीवित हैं और स्वयं SDM कार्यालय पहुंचे। नवाब समेत कई गांववालों ने कहा कि उनके नाम का दुरुपयोग कर फर्जी आपत्तियां लगाई गई हैं, ताकि उनके मतदाता सूची से नाम हटाने की कोशिश की जा सके।
जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने कहा कि 15 जनवरी तक प्राप्त सभी आपत्तियों को ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा, और आगामी सात दिनों में हर आपत्ति की जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि ये आपत्तियां कहां से और किसके द्वारा दर्ज कराई गईं। उसके बाद ही इन आपत्तियों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
रामगढ़ क्षेत्र में SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी विवाद बढ़ा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर पक्षपात और गलतफहमी फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप बताते हुए निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भरोसा जताया।
स्थानीय ग्रामीण और राजनीतिक दल निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाने की कोशिश न की जाए। प्रशासन ने जांच का वादा किया है, लेकिन यह देखना बाकी है कि ग्रामीणों की आशंका और आरोप कितने सही साबित होते हैं और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता कितनी बनी रहती है।