उत्तर प्रदेश के शामली से सामने आया अयुष मलिक का मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है। धर्म परिवर्तन और मुस्लिम महिला से विवाह के बाद कथित तौर पर उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध हिरासत में रखे जाने के आरोपों पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बुधवार को अयुष को पेश करने का आदेश पूरा कराया। अदालत के सामने अयुष ने अपने फैसले को लेकर स्पष्ट रुख रखा और कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार किया है तथा वह अपनी पत्नी चांदनी कुरैशी के साथ रहना चाहते हैं।
अयुष की बात सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पुलिस को उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वैवाहिक जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया। मामले में सामने आए घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल बहस के केंद्र में ला दिया है कि किसी वयस्क व्यक्ति के धर्म और जीवनसाथी के चुनाव में परिवार या प्रशासन की भूमिका की सीमा कहां तक हो सकती है।
दोस्त ने हाई कोर्ट में दाखिल की थी हैबियस कॉर्पस याचिका
मामला हाई कोर्ट तक अयुष के दोस्त सुल्तान की ओर से दाखिल की गई हैबियस कॉर्पस याचिका के जरिए पहुंचा। याचिका में दावा किया गया था कि अयुष को उनके पिता की निगरानी में रखा गया है और उनकी कथित हिरासत में सरकारी अधिकारियों की भी भूमिका रही है।
याचिकाकर्ता पक्ष के मुताबिक अयुष ने अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया और इसके बाद चांदनी कुरैशी से विवाह किया। बताया गया कि यह फैसला उनके पिता को स्वीकार नहीं था और इसी के बाद विवाद बढ़ा।
याचिका में अयुष की स्वतंत्रता पर कथित रोक को चुनौती देते हुए उन्हें अदालत के सामने पेश कराने की मांग की गई थी।
9 सितंबर को अदालत ने मांगा था अयुष का जवाब
इस मामले में 9 सितंबर को न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने अयुष को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था। अदालत ने उस समय मामले में लगाए गए अवैध हिरासत के आरोपों और राज्य के अधिकारियों की कथित भूमिका को गंभीर प्रकृति का माना था।
हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों और अयुष के पिता देवराज सिंह मलिक को निर्देश दिया था कि अयुष को 16 सितंबर को अदालत के सामने पेश किया जाए।
इस आदेश के पीछे अदालत के लिए सबसे अहम सवाल यह था कि अयुष वास्तव में अपनी इच्छा से कहां और किसके साथ रहना चाहते हैं।
*अदालत में अयुष ने धर्म परिवर्तन को बताया स्वैच्छिक
16 सितंबर की सुनवाई में अयुष मलिक को अदालत के सामने पेश किया गया। सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम स्वीकार किया है। उन्होंने किसी तरह के दबाव या जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन किए जाने की बात से इनकार किया और अपनी पत्नी चांदनी कुरैशी के साथ रहने की इच्छा जताई।
अदालत के सामने अयुष की ओर से अपनी इच्छा स्पष्ट किए जाने के बाद पुलिस को उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया गया।
यानी मामले में अदालत के सामने खुद अयुष की इच्छा ने अहम भूमिका निभाई—वह किस धर्म को मानना चाहते हैं और किसके साथ अपना वैवाहिक जीवन बिताना चाहते हैं।
*पिता की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू पुलिस में दर्ज प्राथमिकी है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड और रिपोर्टों के मुताबिक अयुष के पिता की शिकायत पर 6 जून 2026 को शामली पुलिस थाने में चांदनी कुरैशी और उनके कुछ रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
FIR में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं का इस्तेमाल किया गया था।
याचिकाकर्ता पक्ष ने इस प्राथमिकी को गलत और दुर्भावना से प्रेरित बताया है। हालांकि FIR में लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता का फैसला इस रिपोर्ट के समय अदालत द्वारा नहीं किया गया है।
*हाई कोर्ट की टिप्पणी में ‘प्रथम दृष्टया’ स्थिति महत्वपूर्ण
मामले की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया यह संकेत दिया था कि रिकॉर्ड से अयुष के अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार करने और चांदनी से विवाह करने की बात सामने आती है।
लेकिन यहां ‘प्रथम दृष्टया’ शब्द को समझना जरूरी है। इसका अर्थ किसी मामले में अंतिम न्यायिक फैसला नहीं होता। अदालत ने उस चरण में उपलब्ध सामग्री के आधार पर टिप्पणी की थी और साथ ही मामले में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अयुष को स्वयं अदालत के सामने पेश कराने का रास्ता अपनाया।
16 सितंबर को अयुष के अदालत में पेश होने और अपनी इच्छा बताने के बाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा तत्काल प्रश्न अलग दिशा में आगे बढ़ा।
धर्म परिवर्तन और विवाह के सवाल से आगे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा
अयुष मलिक प्रकरण को केवल धर्म परिवर्तन या अंतरधार्मिक विवाह के विवाद के रूप में देखना पूरे घटनाक्रम को सीमित कर देगा। इस मामले में एक वयस्क व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अपनी आस्था चुनने और अपने जीवनसाथी के साथ रहने की इच्छा भी न्यायिक विमर्श का हिस्सा बनी है।
भारत में वयस्क नागरिकों के व्यक्तिगत चुनाव और स्वतंत्रता से जुड़े सवाल कई मौकों पर अदालतों के सामने आते रहे हैं। हालांकि हर मामले के तथ्य और कानूनी परिस्थितियां अलग होती हैं।
इस मामले में भी उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण कानून के तहत दर्ज FIR और उसमें लगाए गए आरोप अपनी जगह न्यायिक जांच का विषय हैं, जबकि अयुष की ओर से धर्म परिवर्तन और विवाह को स्वैच्छिक बताया जाना दूसरी महत्वपूर्ण बात है।
आगे भी जारी रहेगी कानूनी कार्यवाही
16 सितंबर की सुनवाई में अयुष की व्यक्तिगत इच्छा सामने आने और पुलिस को हस्तक्षेप न करने के निर्देश के बावजूद मामले से जुड़े सभी कानूनी पहलू समाप्त नहीं हुए हैं। FIR और उससे संबंधित कार्यवाही अपने कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यही है कि जिस व्यक्ति को कथित तौर पर उसकी इच्छा के विरुद्ध रखे जाने का आरोप लगाकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था, उसने अदालत के सामने खुद अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
अयुष ने कहा कि इस्लाम स्वीकार करना उनका अपना फैसला था और वह चांदनी कुरैशी के साथ रहना चाहते हैं। हाई कोर्ट ने उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए पुलिस को उनके फैसले में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया है।
मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया यह तय करेगी कि FIR में लगाए गए आरोपों और अन्य कानूनी प्रश्नों का अंतिम स्वरूप क्या होगा।
