बेंगलुरु में फिर मामला: हिंदुत्व कार्यकर्ता पुनीत केरेहल्ली पर डीजीपी एम.ए. सलीम के खिलाफ झूठे आरोप, FIR दर्ज

कर्नाटक की साइबरक्राइम पुलिस ने हिंदुत्व कार्यकर्ता और हत्या के आरोपी पुनीत केरेहल्ली के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई पुनीत पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, राज्य के डायरेक्टर जनरल और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस एम.ए. सलीम के खिलाफ “बेनामी” संपत्ति के मालिक होने और “अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों” को आश्रय देने के झूठे और भड़काऊ आरोप लगाने के लिए की गई है।

पुलिस के अनुसार, यह मामला 23 जनवरी, 2026 को बेंगलुरु सिटी पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम को एक वायरल वीडियो मिलने के बाद दर्ज किया गया। वीडियो में केरेहल्ली अपने कुछ साथियों के साथ सोलदेवनहल्ली के सकीना तस्लीम के घर पहुंचे। वहां केरेहल्ली ने न केवल इस संपत्ति को DG&IGP सलीम की “बेनामी” संपत्ति बताया बल्कि यह भी दावा किया कि अवैध बांग्लादेशी नागरिक वहाँ रह रहे हैं। उन्होंने लाइव वीडियो भी बनाया और इसे फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C (पहचान की चोरी) और भारतीय कानून ‘भारतीय न्याया संहिता’ की धाराओं 196 (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), 353(1)(b) और 197(1)(c) के तहत FIR दर्ज की है। इन धाराओं के तहत सार्वजनिक अशांति फैलाने और राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ बयान देने जैसे आरोप शामिल हैं।

यह पुनीत केरेहल्ली के खिलाफ इस महीने में दर्ज तीसरे मामले में से एक है। इससे पहले 16 जनवरी को बेंगलुरु पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से घरों में घुसने और निवासियों को “बांग्लादेशी अवैध अप्रवासी” बताने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

पुनीत केरेहल्ली पर कई गंभीर आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं और वह हत्या के आरोपों से भी बरी नहीं हुए हैं, बावजूद इसके वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हुए भड़काऊ बयान देता रहा है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की झूठी जानकारी फैलाने वाली सामग्री सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है, इसलिए कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

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