बीजेपी सांसद संजय जायसवाल का आरोप: जन सुराज पार्टी के 14 करोड़ रुपये के चंदे में वित्तीय अनियमितता की आशंका

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है। इस बीच, बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज को 14 करोड़ रुपये का चंदा एक घाटे में चल रही कंपनी से मिला है, जो वित्तीय अनियमितता का संकेत देता है।

संजय जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश के सांसद अयोध्या रामी रेड्डी की कंपनी, जो 19 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही है, ने जन सुराज पार्टी को 14 करोड़ रुपये का चंदा दिया। इस संदर्भ में उन्होंने चुनाव आयोग की वेबसाइट से जन सुराज पार्टी की ऑडिट रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें पार्टी का 2023-24 का खर्च महज 35,000 रुपये दिखाया गया है, जबकि पार्टी ने 200 गाड़ियों, फाइव स्टार टेंट और दर्जनों कर्मचारियों की नियुक्ति की थी।

संजय जायसवाल ने प्रशांत किशोर से सात सवाल पूछे हैं

1.14 करोड़ रुपये का चंदा जन सुराज पार्टी की आय में क्यों नहीं दिखाया गया?

2.पार्टी का 2023-24 का खर्च महज 35,000 रुपये क्यों है?

3.सैकड़ों गाड़ियों और कर्मचारियों का खर्च कहां गया?

4.17 सितंबर 2024 तक पार्टी अध्यक्ष सरत कुमार मिश्रा थे, तो 2 अक्टूबर 2024 को गांधी मैदान से “नया गठन” क्यों हुआ?

5.चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑडिट रिपोर्ट और PK के दावे में फर्क क्यों है?

6.क्या चंदे का पैसा PK के निजी खाते में रखा गया?

7.जन सुराज पार्टी की वास्तविक उत्पत्ति और नेतृत्व को लेकर इतनी गड़बड़ी क्यों है?

प्रशांत किशोर ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें डोनेशन वही लोग देते हैं, जिनकी मदद उन्होंने पहले की है। उन्होंने स्वीकार किया कि अयोध्या रामी रेड्डी ने अपनी कंपनी के माध्यम से जन सुराज को डोनेशन दिया है। उनका कहना था कि यह डोनेशन पारदर्शी था और पार्टी के कार्यों में इस्तेमाल किया गया।

इस विवाद ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। जहां बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने जन सुराज पार्टी की फंडिंग और खर्चों पर सवाल उठाए हैं, वहीं प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी की वित्तीय गतिविधियों को पारदर्शी बताया है। आगामी चुनावों में यह मुद्दा महत्वपूर्ण बन सकता है, क्योंकि मतदाता पार्टी की वित्तीय ईमानदारी और पारदर्शिता को लेकर सजग हैं।

बीजेपी सांसद संजय जायसवाल के आरोपों ने जन सुराज पार्टी और प्रशांत किशोर के खिलाफ एक नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इस मामले की जांच करता है या नहीं, और क्या यह विवाद आगामी चुनावों में जन सुराज पार्टी की छवि को प्रभावित करता है।

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