उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र में दलित बारातियों पर हुए कथित हमले के मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर पीड़ित पक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना 12 नवंबर की देर रात की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है। वीडियो में हमलावरों के हाथ में हथियार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस ने प्रकरण में केवल शांतिभंग की धारा के तहत ही कार्रवाई की है।
मेवली गांव निवासी धर्मपाल सिंह अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ एक विवाह समारोह में शामिल होने जा रहे थे। आरोप है कि रास्ते में दो अज्ञात युवकों ने उनकी कार को ओवरटेक कर जबरन रुकवा लिया। धर्मपाल सिंह के अनुसार, उनकी कार पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगी थी। प्रतिमा को देखते ही आरोपियों ने जातिसूचक गालियां देनी शुरू कर दीं और चाकू सहित अन्य हथियारों से हमला करने का प्रयास किया।
वीडियो में एक युवक के हाथ में पारदर्शी पुलिसिया डंडा तथा दूसरे के हाथ में पिस्टल दिखाई दे रही है। आरोप है कि पुलिस ने इस मामले को दो दिनों तक गंभीरता से नहीं लिया। 13 नवंबर की रात वीडियो वायरल होने के बाद ही उच्च अधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय पुलिस हरकत में आई और एक आरोपी नीटू को गिरफ्तार किया गया। किंतु गिरफ्तारी भी केवल धारा 151 (शांतिभंग) के तहत ही दिखायी गई। दूसरा आरोपी अब भी फरार है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने घटना की तहरीर SC/ST एक्ट के तहत दी थी, लेकिन पुलिस ने इसे दर्ज न करके साधारण मामला दिखाने की कोशिश की। वीडियो में हथियार साफ दिखाई देने के बावजूद पुलिस अब तक पिस्टल व पारदर्शी डंडे की बरामदगी नहीं कर सकी है।
थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने पुष्टि की है कि एक आरोपी के विरुद्ध शांतिभंग की कार्रवाई की गई है। हालांकि, जातिसूचक गालियों, हथियार दिखाने और हमले की कोशिश जैसे गंभीर तत्वों के बावजूद कठोर धाराओं को शामिल न किए जाने को लेकर पुलिस की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि बदायूं जिले में बारातों के दौरान विवादों की यह पहली घटना नहीं है। हाल ही में सरैरा गांव में भी एक बारात के दौरान जातिसूचक गानों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसमें पथराव और मारपीट तक की नौबत आ गई थी।
पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों ने उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस की ओर से बरती गई ढिलाई को लेकर दलित समुदाय में रोष व्याप्त है।