मनुस्मृति दहन दिवस पर चर्चा करने के कारण भगत सिंह छात्र मोर्चा से जुड़े बनारस हिंदू विश्विद्यालय के 13 छात्र भेजे गए जेल

कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (सीएएसआर) ने छात्र कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और मानसिक उत्पीड़न की कड़ी निंदा किया

दिल्ली (प्रेस रिलीज़/इंसाफ़ टाइम्स) 26 दिसंबर 2024 को, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भगत सिंह छात्र मोर्चा (बीएसएम) के 13 सदस्यों को गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने के बाद गिरफ्तार किया गया और 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, 25 दिसंबर को बीएचयू के कला संकाय में मनुस्मृति दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया था. यह ऐतिहासिक दिन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाबा साहब अंबेडकर ने इसी दिन 1927 में मनुस्मृति का दहन किया था। भगत सिंह छात्र मोर्चा (बीएसएम) के छात्र इस विषय पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए थे

छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (सीएएसआर) ने प्रेस रिलीज़ जारी किया है और कहा कि “चर्चा के दौरान शाम करीब साढ़े सात बजे बीएचयू प्रॉक्टोरियल बोर्ड के गार्ड आए और छात्रों से अभद्रता करने लगे और उन्हें खींचकर प्रॉक्टोरियल बोर्ड कार्यालय में बंद कर दिया, इस हमले के दौरान छात्र घायल हो गए, उनके कपड़े फाड़ दिए गए और उनके चश्मे तोड़ दिए गए. हिरासत में लिए गए साथियों की मदद के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड पर इकट्ठा हुए सभी छात्रों के साथ बदसलूकी और पिटाई के बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद छात्रों को बीएचयू गार्ड और वाराणसी पुलिस दोनों ने कई तरह से धमकाया, जिसमें उनका भविष्य बर्बाद करने की धमकी भी शामिल थी.फिर पुलिस ने 3 लड़कियों समेत सभी छात्रों के साथ मारपीट की और जबरन पुलिस वैन में लाद कर ले गई. सभी 13 छात्रों को रात भर लंका थाने में बंद रखा गया और उन्हें अपने वकील से भी नहीं मिलने दिया गया. जब छात्रों ने अपने वकील से मिलने की जिद की तो लंका थाने के SHO शिवाकांत मिश्रा ने कानूनी प्रक्रिया को खारिज कर दिया और कहा, “यह मेरा पुलिस स्टेशन है और मेरी इच्छा के अनुसार चीजें होंगी, आप अदालत में अपनी वकालत का काम कर सकते हैं।” थाने में सभी कार्यकर्ताओं के फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें अपने घर पर सूचना तक नहीं देने दी गई. यह सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग की गाइडलाइन का खुला उल्लंघन है.आज 26 तारीख को रिमांड कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया. FIR में बेहद गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं”

छात्रों पर भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 132 – सरकारी कर्मचारी या लोक सेवक पर हमला (गैर जमानती),धारा 121(2) सरकारी कर्मचारी को गंभीर चोट पहुंचाने पर एक से दस साल तक की कैद और जुर्माना,धारा 196 (1) (बी) शांति भंग करना और समुदायों के बीच सद्भाव को नुकसान पहुंचाना,धारा 299 बीएनएस – धर्म या उससे जुड़ी चीजों का अपमान, तीन साल तक की कैद, जुर्माना,धारा 110 बीएनएस- गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास,धारा 191 (1) बीएनएस- दंगा, 5 साल तक की सज़ा,धारा 115 (2) बीएनएस- जानबूझकर चोट पहुंचाना, के तहत मुकद्दमा दर्ज किया गया है

कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन ने कहा कि “यह कार्रवाई ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी ताकतों के इशारे पर की गयी है. बीएचयू प्रशासन और पुलिस प्रशासन के दमनकारी रवैये से साफ पता चलता है कि इसके पीछे खुलेआम बीजेपी-आरएसएस का हाथ है. लोकतांत्रिक होने का दंभ भरने वाले भारतीय राज्य की हालत ऐसी है कि मनुस्मृति पर चर्चा करने पर आपको जेल जाना पड़ सकता है। मनुस्मृति वह है जो महिलाओं, शूद्रों और दलितों को एक जानवर से भी बदतर दर्जा देता है, जो देश के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के खिलाफ है। हम दावा करते हैं कि राजकीय दमन द्वारा लोकतांत्रिक समाज के लिए लड़ने वाले लोगों के आंदोलन को तोड़ने का ब्राह्मणवादी हिंदुत्ववादी ताकतों का भ्रम, उत्पीड़ित और शोषित लोगों की व्यापक एकता से टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। दरअसल, उनका भ्रम पहले ही टूट चुका है क्योंकि 13 छात्र कार्यकर्ताओं ने जेल जाते वक्त बहादुरी के साथ मनुस्मृति मुर्दाबाद और इंकलाब जिंदाबाद जैसे नारे लगाए”

कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन ने कहा कि “हम मांग करते हैं कि सभी कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और फर्जी एफआईआर रद्द की जाए। छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट करने वाले पुलिस और बीएचयू गार्ड के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। हम सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील लोगों से अपील करते हैं कि इस ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी राज्य के दमन का विरोध करने के लिए एकजुट हों, जो छात्रों और अन्य संघर्षरत लोगों पर लगातार हमले कर रही है”

कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन में एआईआरएसओ,एआईएसए, एआईएसएफ,एपीसीआर, एएसए,बापसा बीबीएयू, बीएएसएफ, बीएसएम, भीम आर्मी, बीएससीईएम, सीईएम, कलेक्टिव, सीआरपीपी, सीएसएम सीटीएफ, डीआईएसएससी, डीएसयू, डीटीएफ, फोरम अगेंस्ट रिप्रेशन तेलंगाना, बिरादरी, आईएपीएल, इनोसेंस नेटवर्क, कर्नाटक जनशक्ति, एलएए, मजदूर अधिकार संगठन, मजदूर पत्रिका, एनएपीएम, नजरिया, निशांत नाट्य मंच, नौरोज़, एनटीयूआई, पीपुल्स वॉच, रिहाई मंच, समाजवादी जनपरिषद, समाजवादी लोक मंच, बहुजन समाजवादी मंच, एसएफआई, यूनाइटेड पीस अलायंस, डब्ल्यूएसएस, वाई4एस जैसे संगठन शामिल हैं

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