बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भाकपा-माले ने राज्य में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ व्यापक जनप्रतिरोध खड़ा करने का आह्वान किया है। पार्टी का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन आगामी 16 से 18 मई 2026 तक दरभंगा के लहेरियासराय स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित होगा। सम्मेलन को लेकर जारी अपील में पार्टी ने राज्य में “बुलडोजर राज”, कॉरपोरेट भूमि अधिग्रहण, बेरोजगारी, अल्पसंख्यकों पर हमले और लोकतांत्रिक अधिकारों पर संकट जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। सम्मेलन का नारा “एकजुट रहें, न्याय व अधिकार की लड़ाई तेज करें” रखते हुए भाकपा-माले ने इसे बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक मोड़ बताया है।
पार्टी ने आरोप लगाया है कि बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित होने के बाद दलितों, गरीबों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाइयों में तेजी आई है। जारी बयान में कहा गया है कि “बुलडोजर कार्रवाई, चयनात्मक एनकाउंटर, मॉब लिंचिंग और छात्र-युवाओं पर दमन” को सरकार सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
भाकपा-माले ने राज्य सरकार पर कॉरपोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने का आरोप भी लगाया। पार्टी के अनुसार भागलपुर में अडाणी समूह को जमीन दिए जाने और कई जिलों में सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की तैयारी किसानों और ग्रामीण आबादी के लिए गंभीर खतरा है। पार्टी का कहना है कि इससे खेती, रोजगार और विस्थापन का संकट और गहरा होगा।
सम्मेलन में रोजगार, ठेका कर्मियों की स्थिति, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी कर्मचारियों के वेतन-पेंशन से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जाएंगे। पार्टी ने दावा किया कि राज्य के बड़ी संख्या में कर्मचारियों को पिछले कई महीनों से वेतन और पेंशन भुगतान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भाकपा-माले ने मिथिला की ऐतिहासिक राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि दरभंगा की धरती से लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की नई लड़ाई का संदेश दिया जाएगा। सम्मेलन स्थल को “रेणु-नागार्जुन नगर” नाम दिया गया है, जबकि सभागार का नाम राजाराम, रामदेव वर्मा और लक्ष्मी पासवान के नाम पर रखा गया है।
16 मई को आयोजित खुले सत्र में भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य मुख्य वक्ता होंगे। इसके अलावा बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव तथा इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं के भी शामिल होने की घोषणा की गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सम्मेलन केवल संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि बिहार में भाजपा विरोधी राजनीति को धार देने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकता और जनआंदोलन की रणनीति पर भी इस सम्मेलन में चर्चा होने की संभावना है।
