मुज़फ़्फरपुर में गिरिराज सिंह का हमला : “ममता बनर्जी सुहरावर्दी की राह पर, आज देश में कई जिन्ना मौजूद”,कार्यकर्ताओं में बांटा तलवार

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

नवरात्रि के अवसर पर शनिवार को बिहार के मुज़फ़्फरपुर में आयोजित एक फलाहार कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा प्रहार किया। खादी भंडार सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में गिरिराज सिंह ने ममता बनर्जी की तुलना 1946-47 के दौरान बंगाल के प्रधानमंत्री रहे हुसैन सुहरावर्दी से की और कहा कि उनकी नीतियाँ हिंदू विरोधी हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत दुर्गा की आरती और पूजन से हुई। इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने बुलडोज़र से फूल बरसाकर केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया। गिरिराज सिंह ने कार्यकर्ताओं को तलवारें भेंट कीं और धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए सशक्त और सजग रहने का आह्वान किया।

गिरिराज सिंह ने कहा, “ममता बनर्जी, सुहरावर्दी की राह पर चल रही हैं। डायरेक्ट एक्शन प्लान की तरह उनकी नीतियाँ हिंदू विरोधी हैं और बंगाल में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे रही हैं। एक जिन्ना ने भारत को बाँटकर पाकिस्तान और बांग्लादेश बनाया था, लेकिन आज देश में कई जिन्ना मौजूद हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप और सुदर्शन चक्रधारी स्वरूप का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग केवल माखन चुराने और बांसुरी बजाने वाले कृष्ण की पूजा करते हैं, जबकि उनके शौर्य स्वरूप की उपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि यही कारण रहा कि कृष्ण जन्मभूमि पर कब्ज़ा हो गया।

पत्रकारों से बातचीत में गिरिराज सिंह ने राजद नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कभी बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। उन्होंने लालू प्रसाद यादव को लेकर कहा कि उनके लिए “दिल के अरमां आंसुओं में बह गए” गीत बिल्कुल सटीक बैठता है।
गांधी-नेहरू परिवार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि नेहरू से लेकर सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी तक महिलाओं के लिए कुछ नहीं कर पाए। इसके उलट, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की सराहना की।

महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए गिरिराज सिंह ने “लाखपति दीदी” योजना को ऐतिहासिक कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना सिर्फ़ 75 हज़ार करोड़ की नहीं, बल्कि 75 लाख करोड़ की भी हो सकती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि योजना का प्रचार-प्रसार करें ताकि अधिक से अधिक महिलाएँ आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।

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