खाड़ी युद्ध: होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर टकराव से तेल की कीमतें $120 तक उछलीं, विशेषज्ञों का अनुमान $150‑$200 तक बढ़ने का, वैश्विक अर्थव्यवस्था और उभरते बाजारों पर दबाव, क्षेत्रीय तनाव और मानवीय संकट गहरा

मध्यपूर्व में अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर सैन्य अभियान का 12वां दिन भी जारी रहा। इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को हिला दिया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर गहरा प्रभाव डाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ता रहा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और उभरते बाजारों पर भी महसूस किया जाएगा।

संघर्ष की वर्तमान स्थिति

ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग Strait of Hormuz (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) पर जहाजों की आवाजाही को रोकने की चेतावनी दी है। यह मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन करता है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अगर कोई जहाज इस मार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे रोकने के लिए मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाएंगे। इस घोषणा के बाद तेल की कीमतों में तेजी देखी गई, ब्रेंट क्रूड $120 प्रति बैरल तक पहुँच गया, जबकि बाद में उतार‑चढ़ाव के कारण यह $90 के आसपास स्थिर हुआ।

साथ ही, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इज़राइल की सैन्य संपत्तियों पर लगातार हमले जारी रखे हैं। दक्षिणी खाड़ी के बंदरगाहों में अस्थिरता बढ़ गई है और व्यापारिक जहाज़ों को भी खतरा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि यह संघर्ष मानवीय संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विघटन का कारण बन सकता है।

ट्रंप प्रशासन की रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को खुला रखना है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान इस मार्ग में व्यवधान डालेगा, तो अमेरिका “और भी सख्त” कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्ध जल्द खत्म होने की संभावना है, लेकिन अमेरिकी सेना के पास लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने की पूरी क्षमता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ईरान और ओमान की अनुमति के इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल करना कठिन होगा। केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक प्रयास के माध्यम से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि तेल का मार्ग सुरक्षित रहे।

वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव

तेल की बढ़ती कीमतों ने उभरते बाजारों में महंगाई बढ़ा दी है। वित्तीय बाजार अस्थिर हो गए हैं और निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। भारत, चीन और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्थाएं भी उच्च ऊर्जा लागत के कारण दबाव में हैं।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा, तो तेल की कीमतें $150‑$200 प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक दबाव और महंगाई में वृद्धि की संभावना भी है।

विशेषज्ञ विश्लेषण

अमीन नासेर, CEO, अरामको “संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता है। यदि यह लंबे समय तक जारी रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।”

स्कॉट लुकास, प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन “अगर अमेरिकी घरेलू दबाव बढ़ा, तो गल्फ़ देशों के लिए युद्ध को समाप्त करने की अपील का अवसर बन सकता है।”

रोब गाइस्ट पिनफोल्ड, किंग्स कॉलेज लंदन “ईरान का युद्ध संचालन पहले से अलग है। उनका अब लक्ष्य केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाना भी है।”

मध्यपूर्व में यह संघर्ष जारी है, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर तनाव बना हुआ है और तेल की कीमतें अस्थिर हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था, उभरते बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कूटनीतिक प्रयास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही इस संकट को नियंत्रित किया जा सकता है।

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