कौशांबी में मासूम बेटियों की दर्दनाक कहानी: माता-पिता ने 5 और 3 लाख में बेचा, गैंगरेप के बाद भागकर बचाई जान

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां गरीबी के चलते माता-पिता ने अपनी दो नाबालिग बेटियों को लाखों रुपये में बेच दिया। 13 और 14 साल की इन मासूमों को खरीदारों और उनके साथियों द्वारा गैंगरेप का शिकार बनाया गया। दोनों लड़कियों ने किसी तरह अपने अपहरणकर्ताओं से भागकर अपनी जान बचाई और अपनी मौसियों से मदद मांगी।

पुलिस और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 वर्षीय लड़की को उसके माता-पिता ने एटा जिले के कर्मवीर यादव को 5 लाख रुपये में बेच दिया था। लड़की ने आरोप लगाया कि कर्मवीर ने उसे दो दिनों तक बंधक बनाकर उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने बताया कि कर्मवीर ने ही उसे सूचित किया था कि उसने उसके माता-पिता से उसे 5 लाख में खरीदा है। किसी तरह भागकर वह अपनी मौसी के घर मंझनपुर पहुंची। मौसी ने बताया, “मैं उसे उसके माता-पिता के पास ले गई, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्होंने उसे कर्मवीर को बेच दिया था। इसके बाद हम पुलिस के पास गए।” मौसी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरू में मामले में ढिलाई बरती।

दूसरी 14 वर्षीय लड़की की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है। उसे उसके माता-पिता ने 3 लाख रुपये में बेच दिया था। खरीदारों द्वारा गैंगरेप का शिकार होने के बाद वह भी भागकर अपनी मौसी के पास पहुंची। दोनों मामलों में पुलिस ने अब कार्रवाई शुरू की है। 13 वर्षीय लड़की के मामले में माता-पिता, एक बिचौलिया और कर्मवीर यादव सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दूसरी लड़की के मामले में भी जांच चल रही है, और पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।

स्थानीय पुलिस अधीक्षक ने बताया, “हमने दोनों मामलों में FIR दर्ज की है और जांच तेज कर दी गई है। आरोपियों को सजा दिलाने के लिए सभी सबूत जुटाए जा रहे हैं।” हालांकि, पीड़िताओं के रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया है।

कौशांबी में मानव तस्करी और नाबालिगों के साथ इस तरह की क्रूरता ने समाज में गहरी चिंता पैदा कर दी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि गरीबी और जागरूकता की कमी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। एक कार्यकर्ता ने कहा, “यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था की विफलता है। सरकार को गरीब परिवारों के लिए बेहतर योजनाएं लागू करनी चाहिए ताकि कोई माता-पिता अपनी बेटी को बेचने के लिए मजबूर न हो।”

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