वाराणसी,उत्तरप्रदेश: 13 किलोमीटर पैदल चलकर थाने पहुंची नाबालिग: सोनभद्र में मां को ‘डायन’ बताकर पीटे जाने की शिकायत पर तीन के खिलाफ एफआईआर

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के सोनभद्र जनपद में अंधविश्वास और सामाजिक क्रूरता की एक और घटना सामने आई है, जिसमें एक नाबालिग बच्ची ने 13 किलोमीटर पैदल चलकर थाने पहुंच अपनी मां को ‘डायन’ बताकर पीटे जाने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटना दुद्धी थाना क्षेत्र के बरहपन गांव की है। मंगलवार सुबह गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब कक्षा आठ की छात्रा अपनी मां की जान बचाने के लिए अकेले पैदल चलकर दुद्धी थाने पहुंच गई और पुलिस को बताया कि उसके पड़ोसी कई दिनों से उसकी मां को डायन बताकर मारपीट कर रहे हैं।

थाने में पहुंचते ही बच्ची ने रोते हुए पुलिस अधिकारियों को बताया कि पड़ोस की देवांती देवी, उसकी सास शकुंती देवी और एक युवक सोनू, उसकी मां को डायन बताकर न सिर्फ गाली-गलौज करते हैं, बल्कि कई बार मारपीट भी कर चुके हैं। बच्ची ने बताया कि मंगलवार सुबह तीनों ने उसकी मां को फिर से पीटना शुरू कर दिया। जब उसने और उसकी छोटी बहन ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उन्हें भी मारा गया। घटना के बाद बच्ची गांव से निकल पड़ी और जंगल-पहाड़ के रास्तों से होते हुए करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित दुद्धी थाने तक पहुंची।

सोनभद्र के अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि बच्ची की शिकायत पर देवांती देवी, शकुंती देवी और सोनू के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। बच्ची को घर भेज दिया गया है और उसकी मां की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

बच्ची का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उसके पिता रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते हैं और घर पर उसकी मां और छोटी बहन के साथ सिर्फ तीन सदस्य रहते हैं। महिला पर लगातार मानसिक और शारीरिक अत्याचार किए जा रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।

सोनभद्र, मिर्जापुर, झारखंड सीमा जैसे क्षेत्रों में आज भी महिलाओं को बीमारियों या घरेलू कलह का कारण मानकर ‘डायन’ कहकर प्रताड़ित किया जाता है। यह घटना न सिर्फ अंधविश्वास की भयावहता को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है।

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि जब शासन-प्रशासन और समाज आंखें मूंद लेता है, तब एक मासूम की आवाज भी परिवर्तन की शुरुआत बन सकती है। सोनभद्र की इस बच्ची ने न सिर्फ अपनी मां को बचाने की कोशिश की, बल्कि हजारों दबे-कुचले लोगों को न्याय की उम्मीद भी दी है!

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