वक्फ़ बिल विरोधी धरना से पहले मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा एलान – ‘नीतीश, नायडू, चिराग को मुसलमान वोट नहीं देंगे’; चंद्रशेखर से लेकर लालू यादव तक तमाम नेता होंगे शामिल

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ़ बिल को लेकर 27 मार्च को पटना के गर्दनीबाग में होने जा रहे वक्फ़ विरोधी धरना प्रदर्शन से पहले बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने साफ़ कहा कि “जो हमारा साथ नहीं देगा, वह हमारा साथ खो देगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान इस बिल का समर्थन करते हैं, तो मुस्लिम समुदाय उन्हें वोट नहीं देगा।

‘जो हमारा साथ नहीं देगा, वह हमारा साथ खो देगा’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया ने सवाल किया कि क्या नीतीश कुमार, नायडू और चिराग अगर वक्फ़ बिल का समर्थन करते हैं तो बोर्ड मुस्लिम समुदाय से उन्हें वोट न देने की अपील करेगा? इस पर डॉ. इलियास ने दो टूक जवाब देते हुए कहा – “हां, हमारा साथ खो देंगे का मतलब यही है।”

उनका यह बयान बिहार और अन्य राज्यों की राजनीति में हलचल मचाने वाला है, क्योंकि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

धरना में शामिल होंगे चंद्रशेखर आजाद से लेकर लालू यादव तक तमाम बड़े नेता

गर्दनीबाग में होने वाले इस धरना प्रदर्शन में विपक्षी दलों के कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। इनमें –

-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव
-नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव
-कांग्रेस और वाम दलों के वरिष्ठ नेता
-एसडीपीआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुहम्मद शफी
-आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद चंद्रशेखर आजाद

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों को इस आयोजन में आमंत्रित नहीं किया गया है।

इफ्तार पार्टी पर भी दिया जवाब

इफ्तार पार्टी से जुड़े सवाल पर डॉ. इलियास ने कहा कि “इफ्तार पार्टी का फैसला हम सबका था और हमने इसे विरोध के तौर पर आयोजित करने का निर्णय लिया था।”

बिहार की सियासत में बढ़ी हलचल

बोर्ड के इस बयान के बाद बिहार और अन्य राज्यों में सियासी हलचल तेज़ हो गई है। खासकर, नीतीश कुमार (JDU), चिराग पासवान (LJP) और चंद्रबाबू नायडू (TDP) के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है।

बिहार में 16-17% मुस्लिम वोट बैंक है, जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकता है। अब देखना यह होगा कि वक्फ़ बिल पर इन नेताओं का रुख क्या रहता है और वे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विरोध का सामना करने के लिए अपनी रणनीति बदलते हैं या नहीं।

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