मुजफ्फरपुर में दिगंबर जैन मुनि को हत्या की धमकी, जैन समाज में आक्रोश

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सरैया थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक गंभीर घटना सामने आई, जिसमें दिगंबर जैन मुनि उपसर्गजयी श्रमण श्रीविशल्यसागर जी को हत्या और अपमान की धमकी दी गई। मुनि के साथ दुर्व्यवहार का मामला भी सामने आया है।

पुलिस के अनुसार मुनि वैशाली में आयोजित स्वर्ण कलश और स्वर्ण ध्वज स्थापना समारोह में शामिल होने के लिए बासोकुंड स्थित भगवान महावीर जन्मस्थली परिसर में ठहरे थे। सोमवार की रात सरैया के दोकड़ा स्थित कांटी टोला स्कूल में रात्रि विश्राम करने के बाद मंगलवार सुबह मुनि मड़वन की ओर प्रस्थान कर रहे थे।

इसी दौरान गोपीनाथपुर दोकड़ा के पास बाइक सवार दो युवकों ने उन्हें रोक लिया और गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोपियों ने दिगंबर परंपरा का अपमान करते हुए मुनिराज को वस्त्र पहनने की धमकी दी। मुनि द्वारा विरोध करने पर आरोपियों ने उन्हें गोली मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गए।

धमकी मिलने पर मुनि के अनुयायियों और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद मुनि NH-722 किनारे मौन ध्यान में बैठ गए। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर सरैया थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष सुभाष मुखिया ने बताया कि आरोपी युवकों की पहचान के लिए खोजबीन जारी है। फिलहाल कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।

थानाध्यक्ष ने कहा, “जैन मुनि की यात्रा संबंधी सूचना पहले से पुलिस को नहीं दी गई थी। पुलिस ने उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराते हुए करजा थाना क्षेत्र के अख्तियारपुर मड़वन तक पहुंचाया, जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया।”

घटना के बाद स्थानीय लोग और जैन समाज में गहरा आक्रोश है। संतों की सुरक्षा को लेकर जैनी समुदाय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। मुनिराज अपनी निर्धारित यात्रा के अनुसार अब सीतामढ़ी होते हुए मिथिलापुरी की ओर प्रस्थान कर चुके हैं।

दिगंबर जैन मुनि वस्त्र नहीं पहनते। उनका मानना है कि वस्त्र वासना और विकारों को ढकने के लिए होता है। एक मुनि जिसने विकारों पर विजय पा लिया, उसे वस्त्र की आवश्यकता नहीं होती। वस्त्र रखने, साफ-सफाई और धन की आवश्यकता को त्यागने के बाद मुनि अपने तप और साधना में लीन रहते हैं।

जैन धर्म में दो प्रमुख संप्रदाय हैं। उत्तर भारत में 12 वर्षों तक अकाल के बाद हजारों जैन मुनि दक्षिण भारत चले गए और श्वेताम्बर समुदाय का निर्माण हुआ, जबकि जो उत्तर भारत में रुके वे दिगंबर बने। तभी से दिगंबर जैन मुनि वस्त्र नहीं पहनते।

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