संसद में 22 भारतीय भाषाओं में कार्यवाही का तर्जुमा,उर्दू को मिली जगह,संस्कृत पर विरोध

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की कार्यवाही को 22 भारतीय भाषाओं में तर्जुमा करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। अब तक संसद की कार्यवाही हिंदी और अंग्रेजी के साथ 10 भाषाओं में तर्जुमा की जाती थी। इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु शामिल थीं। अब इनमें छह और भाषाओं—बोडो, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, उर्दू और संस्कृत—को जोड़ा गया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, “हमारी कोशिश है कि आने वाले दिनों में संविधान द्वारा मान्यताप्राप्त सभी 22 भाषाओं में संसद की कार्यवाही का तर्जुमा हो। इसके लिए संबंधित भाषा के विशेषज्ञों की नियुक्ति के साथ इस योजना को लागू किया जाएगा।”

*उर्दू को मिली जगह पर खुशी

उर्दू को भी इस सूची में शामिल किए जाने पर देश के उर्दू भाषी समुदाय ने खुशी जाहिर की है। भारत में उर्दू को दूसरी राजकीय भाषा का दर्जा प्राप्त है और यह बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषा है। भारत में लगभग छह करोड़ लोग उर्दू बोलते और समझते हैं। दुनिया में उर्दू 10वीं सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा है।

मुस्लिम बुद्धिजीवियों और उर्दू के प्रचारकों ने ओम बिरला के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे उर्दू भाषा और संस्कृति को मजबूती मिलेगी।

*संस्कृत पर विरोध
हालांकि, डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने संस्कृत भाषा में तर्जुमा करने के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में सिर्फ 73,000 लोग संस्कृत बोलते हैं। यह किसी भी राज्य की संवाद की भाषा नहीं है। फिर करदाताओं के पैसे को क्यों बर्बाद किया जा रहा है?”

ओम बिरला ने उनके विरोध को खारिज करते हुए जवाब दिया, “आप किस देश में रह रहे हैं? भारत की मूल भाषा संस्कृत रही है। सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए। हम किसी एक भाषा पर नहीं, बल्कि सभी 22 भाषाओं में रूपांतरण की बात कर रहे हैं।”

भारत की अनूठी पहल
ओम बिरला ने कहा कि दुनिया में भारत की संसद इकलौती ऐसी संस्था है जहां एक साथ 22 भाषाओं में कार्यवाही का तर्जुमा किया जा रहा है। यह कदम भारतीय भाषाओं और विविधताओं को सशक्त बनाने का प्रयास है, जिससे सभी क्षेत्रीय भाषाओं को समान अवसर और सम्मान मिल सके।

यह पहल भारत के लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक के रूप में देखी जा रही है।

खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी को मिली नई नेतृत्वकारी दिशा, उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित शोधकर्ता प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ निदेशक नियुक्त

प्रख्यात उर्दू विद्वान, शायर और आलोचक प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ ने आज ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल नहीं किए जाने पर जताई गहरी चिंता

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार सरकार द्वारा “सेवन रिजॉल्व्स-3 (2025-30)”

शोध को वास्तविक समाधानों में बदलना:ज़हूर हुसैन बट

आईआईटी कानपुर-एनवाईयू टंडन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी यह दिखाती है कि उभरती प्रौद्योगिकियों में

मज़फ्फरपुर में उर्दू भाषा प्रकोष्ठ का प्रतियोगिता कार्यक्रम: विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की उत्कृष्ट प्रतिभा, ‘उर्दू नामा’ पत्रिका का हुआ लोकार्पण

उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार सरकार की योजना के अंतर्गत उर्दू भाषा सेल, मज़फ्फरपुर