“हर ज़िले को वायु और ध्वनि प्रदूषण मुक्त बनाएं”: पटना हाईकोर्ट का प्रशासन को सख़्त निर्देश

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

बिहार में वायु और ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती समस्या को गंभीरता से लेते हुए पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सभी जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति राजीव रॉय की एकल पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि “अब वक्त आ गया है कि हर ज़िले को प्रदूषण मुक्त बनाने की ठोस पहल की जाए।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों का रवैया जनहित के मामलों में बेहद उदासीन और अनुत्तरदायी रहा है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारी “एयर कंडीशन्ड कमरों में बैठकर लोगों की तकलीफ़ों से बेख़बर हैं”, जो किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

*महत्वपूर्ण आदेश

राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों को ‘हॉर्न-फ्री ज़ोन’ घोषित किया जाए।
DJ ट्रॉली, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों को जब्त कर कार्रवाई की जाए।
जिला अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक BSPCB की गाइडलाइंस का सख़्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें।
प्रत्येक जिला प्रशासन को प्रदूषण स्तर की रिपोर्ट समय-समय पर अदालत में पेश करनी होगी।

न्यायमूर्ति रॉय ने कहा “सरकारी अधिकारी जनता की परेशानियों को सुनना और समझना नहीं चाहते। वे वही करते हैं जो उनके लिए सुविधाजनक हो, न कि वह जो ज़रूरी हो।”

उन्होंने फ्रांसीसी क्रांति का हवाला देते हुए कहा कि “अगर रोटी नहीं है तो केक खाएं” जैसी मानसिकता से जनता को राहत नहीं दी जा सकती।

कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अविनाश अजय ने बताया कि DJ ट्रॉलियों और शादी-ब्याह या धार्मिक आयोजनों में प्रयोग हो रहे लाउडस्पीकरों से उत्पन्न ध्वनि सामान्य स्तर से हज़ार गुना अधिक है।
उन्होंने बताया कि इससे न केवल स्कूली बच्चे, अस्पतालों में भर्ती मरीज़, बल्कि गर्भवती महिलाओं और बुज़ुर्गों की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है।

राज्य के कई ज़िलों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 से पार जा चुका है। पटना, मुज़फ्फरपुर, गया और बेगूसराय जैसे शहरों में हालात सबसे ज़्यादा खराब हैं। हाईकोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि सभी ज़िले हर छह महीने में वायु और ध्वनि प्रदूषण पर रिपोर्ट पेश करें, लेकिन 10 से अधिक जिलों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।

पटना हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब प्रशासन की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को जमीनी स्तर पर लागू करे और आम नागरिकों को राहत दे। अदालत ने साफ कहा है कि अब सिर्फ काग़ज़ी कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रभावी अमल अपेक्षित है!

खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी को मिली नई नेतृत्वकारी दिशा, उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित शोधकर्ता प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ निदेशक नियुक्त

प्रख्यात उर्दू विद्वान, शायर और आलोचक प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ ने आज ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल नहीं किए जाने पर जताई गहरी चिंता

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार सरकार द्वारा “सेवन रिजॉल्व्स-3 (2025-30)”

शोध को वास्तविक समाधानों में बदलना:ज़हूर हुसैन बट

आईआईटी कानपुर-एनवाईयू टंडन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी यह दिखाती है कि उभरती प्रौद्योगिकियों में

मज़फ्फरपुर में उर्दू भाषा प्रकोष्ठ का प्रतियोगिता कार्यक्रम: विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की उत्कृष्ट प्रतिभा, ‘उर्दू नामा’ पत्रिका का हुआ लोकार्पण

उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार सरकार की योजना के अंतर्गत उर्दू भाषा सेल, मज़फ्फरपुर