पटना हाईकोर्ट ने मनोज मंजिल की सजा बरकरार रखी, माले ने कहा — फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

भाकपा-माले के पूर्व विधायक मनोज मंजिल को पटना उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है। भोजपुर के बहुचर्चित बड़गांव कांड में जिला अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर अपील को उच्च न्यायालय ने खारिज करते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया और कहा कि पार्टी अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव में लिया गया प्रतीत होता है। कुणाल ने कहा, “मनोज मंजिल और हमारे साथियों को गलत तरीके से फंसाया गया था। जिस व्यक्ति की हत्या का आरोप लगाया गया था, उसकी लाश तक बरामद नहीं हुई, फिर भी सभी को उम्रकैद की सजा सुना दी गई।”

माले नेता ने इसे “गरीबों और मजदूरों की आवाज़ को दबाने की साजिश” बताया। उन्होंने कहा कि न्याय के इस संघर्ष को सड़क से अदालत तक जारी रखा जाएगा।

कुणाल ने बिहार और भोजपुर की जनता से अपील की कि वे “न्याय और सच्चाई के पक्ष में खड़े हों” और “ऐसी ताकतों को चुनाव में करारा जवाब दें” जो गरीबों के नेताओं को सजा दिलाने की साजिश रच रही हैं।

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